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अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ, आधार शिविर से 4,603 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था रवाना

Jammu :  बाबा अमरनाथ यात्रा आज यानी 29 जून से शुरू हो गयी है. बालटाल और नुनवान आधार शिविर से 4,603 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था आज शनिवार को 52 दिवसीय तीर्थयात्रा के लिए दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित गुफा मंदिर के लिए रवाना हो गयी है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, उपायुक्तों, पुलिस और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भगवती नगर स्थित यात्री निवास आधार शिविर से हरी झंडी दिखाकर तीर्थयात्रा की शुरुआत की. तीर्थयात्रा 48 किलोमीटर (किमी) लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और 14 किमी लंबे बालटाल मार्ग से शुरू हुई. अमरनाथ यात्रा के लिए ये दोनों पारंपरिक मार्ग हैं. बता दें कि अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त को संपन्न होगी.

अब तक 3.5 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने कराया रजिस्ट्रेशन 

अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए अब तक 3.5 लाख से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है.  भगवती नगर आधार शिविर के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. उन्होंने बताया कि यात्रा के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं. बालटाल और पहलगाम मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. अधिकारियों ने कहा कि नयी सुरक्षा चौकियां स्थापित की गयी हैं. पवित्र गुफा तक पहुंचने के दोनों मार्गों पर 125 सामुदायिक लंगर स्थापित किये गये हैं और 6,000 से अधिक स्वयंसेवक श्रद्धालुओ की सहायता कर रहे हैं.

12 किमी यात्रा कर 13,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित  गुफा मंदिर में पहुंचेंगे तीर्थयात्री

बता दें कि अमरनाथ यात्रा के लिए दो मार्ग हैं. पहला अनंतनाग जिले का 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग. जबकि दूसरा गांदरबल जिले का बालटाल मार्ग. जो करीब 14 किलोमीटर छोटा, लेकिन बेहद दुर्गम है. तीर्थयात्री आधार शिविर से लगभग 13,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर तक 12 किलोमीटर की यात्रा करेंगे. वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाएं कर ली गयी हैं. यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये हैं. सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों के हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

चंद्रमा की रोशनी के आधार पर शिवलिंग का आकार बढ़ता-घटता

यह दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो चंद्रमा की रोशनी के आधार पर बढ़ता और घटता है. हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शिवलिंग पूरा आकार में आता है और उसके बाद अमावस्या तक घटते चला जाता है. मान्यता है कि शिव-पार्वती की अमरकथा सुनने वाला कबूतर का जोड़ा आज भी यहां पर दिखायी देता है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने अमरनाथ गुफा में ही माता पार्वती को अमर होने का रहस्य बताया था. [wpse_comments_template]  

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