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अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र  भारत में CAA लागू किये जाने से परेशान, विरोध जताया, कहा, यह भेदभावपूर्ण...

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 गृह मंत्रालय ने  कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) पर भारतीय मुसलमानों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस कानून का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है. Washington : मोदी सरकार द्वारा भारत में CAA लागू किये जाने का विरोध करते हुए  अमेरिकी सरकार और संयुक्त राष्ट्र सहित ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता व्यक्त की है. संयुक्त राष्ट्र ने भारत के इस कानून(CAA) को मौलिक रूप से भेदभावपूर्ण प्रकृति वाला करार दिया है.                                                 ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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जान लें कि केंद्र की मोदी सरकार ने 31 दिसंबर, 2014 से पूर्व भारत आये पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के लिए  नागरिकता (संशोधन) कानून-2019 (CAA) को सोमवार 11 मार्च को लागू कर दिया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, यह कानून मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव करता है

CAA को लेकर ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना कि यह कानून मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव करता है. कहा कि CAA के तहत उन देशों के शिया मुसलमान अल्पसंख्यकों को जगह नहीं दी गयी है, जहां वे प्रताड़ित हो रहे हैं. ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स ने म्यांमार का नाम लेते हुए कहा कि   भारत ने CAA के तहत उन पड़ोसी देशों को भी बाहर रखा है जहां मुस्लिम(रोहिंग्या) अल्पसंख्यक हैं.

यह भारत के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का उल्लंघन करने वाला है

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स से कहा कि हमने 2019 में भारत के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 (सीएए) को लेकर चिंता जताई थी, क्योंकि यह मूल रूप से भेदभावपूर्ण है. कहा कि यह भारत के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का उल्लंघन करने वाला है.   संयुक्त राष्ट्र जांच रहा है कि सीएए के नियम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन तो नहीं करते.

यह देखना होगा कि यह अधिनियम किस तरह से लागू होगा

रॉयटर्स ने अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता के हवाले से लिखा है कि अमेरिका  नागरिकता संशोधन अधिनियम की अधिसूचना को लेकर चिंतित हैं.   यह देखना होगा कि  यह अधिनियम किस तरह से लागू होगा.  विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक ईमेल के जरिए कहा है कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत हैं.  भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी कहा, वह सीएए विरोध करते हैं,  आव्रजन को लेकर मेरा दृष्टिकोण हमेशा ही बहुलवाद की ओर रहा है.  मानवाधिकारों की वकालत करने वालों का तर्क है कि  यह कानून, नागरिकों के प्रस्तावित राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) के साथ मिलकर, भारत के 20 करोड़ मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव कर सकता है.

 भारतीय मुसलमान को चिंता करने की जरूरत नहीं :  गृह मंत्रालय 

गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि नागरिकता (संशोधन) कानून (सीएए) पर भारतीय मुसलमानों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस कानून का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है. उनके पास हिंदू भारतीय नागरिकों के समान अधिकार हैं. मंत्रालय ने  यह स्पष्ट किया कि इस कानून के बाद किसी भी भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं करना होगा.  इस कानून में भारतीय मुसलमानों नागरिकता को प्रभावित करने वाला कोई प्रावधान नहीं है. [wpse_comments_template]

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