Lagatar Desk : पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास खाली कराने को लेकर चल रहे विवाद के बीच लालू परिवार की सुरक्षा में कटौती के फैसले ने बिहार की राजनीति को और गरमा दिया है. एक ओर सरकार राबड़ी देवी से आवंटित बंगला खाली कराने पर अड़ी हुई है.
वहीं दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था में कटौती के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने अपने आवास से सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस लौटा दिया है. इन दोनों मुद्दों को लेकर आरजेडी और राज्य सरकार के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई व बह, छिड़ गई है.
राबड़ी देवी ने साफ कर दिया है कि वह वर्तमान सरकारी आवास खाली नहीं करेंगी. दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं है और उसका आवंटन नियमों के अनुसार होना चाहिए. विवाद तब और बढ़ गया, जब राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी आवास भाजपा कोटे के मंत्री नंदकिशोर राम के नाम पर आवंटित कर दिया गया.
सरकार का दावा है कि राबड़ी देवी को वैकल्पिक आवास उपलब्ध करा दिया गया है, इसलिए उन्हें वर्तमान बंगला खाली कर देना चाहिए. वहीं आरजेडी इसे पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री के सम्मान से जोड़कर देख रही है.
इस बीच आरजेडी ने उन नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सूची जारी कर सरकार को घेरने की कोशिश की है, जो मंत्री पद पर नहीं होने के बावजूद सरकारी आवासों में रह रहे हैं. पार्टी का आरोप है कि कई पूर्व मंत्री, सांसद और विधायक विशेष श्रेणी के सरकारी बंगलों का लाभ उठा रहे हैं.
हालांकि भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे लोग निर्धारित बाजार दर पर किराया देकर और सरकार की स्वीकृति से आवासों में रह रहे हैं, जो पूरी तरह नियमसम्मत है.
उधर सुरक्षा व्यवस्था में कटौती के फैसले को लेकर भी विवाद गहरा गया है. राज्य सरकार द्वारा हाल ही में वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और राजश्री यादव की सुरक्षा में बदलाव किया गया.
इसके विरोध में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने अपने सरकारी आवास पर तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस लौटा दिया. इसके बाद आवास परिसर से सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हटा ली गई और सुरक्षाकर्मी अपने-अपने बैरकों में लौट गए.

आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सुरक्षा में कटौती का फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है. वहीं सरकार का कहना है कि सुरक्षा का निर्धारण खतरे के आकलन और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है और यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है.
नई व्यवस्था के तहत लालू प्रसाद यादव को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में हाउस गार्ड, अंगरक्षक, पायलट वाहन, एस्कॉर्ट और बुलेटप्रूफ वाहन जैसी सुविधाएं मिलती रहेंगी. राबड़ी देवी को भी सुरक्षा कर्मियों, महिला एवं पुरुष अंगरक्षकों, पायलट और एस्कॉर्ट वाहन के साथ बुलेटप्रूफ कार की सुविधा जारी रहेगी.
हालांकि सुरक्षा बलों की संख्या पहले की तुलना में कम कर दी गई है. वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की वाई-प्लस (Y+) श्रेणी की सुरक्षा यथावत रखी गई है.
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