Chaibasa : झारखंड के सारंडा जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरानकोबरा 209 बटालियन के कांस्टेबल विक्रम यादव ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा कीमिसाल पेश की. भीषण मुठभेड़ में पेट में गोली लगने के बावजूद वे मोर्चे पर डटे रहे औरनक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.
घात लगाकर हमला, जवान ने दिखाया जज्बा
सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि सारंडा के दुर्गम इलाके में नक्सलियों का एक बड़ा दस्तासक्रिय है. इसी आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था. घने जंगलों के बीच नक्सलियों नेघात लगाकर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. शुरुआती हमले में ही कांस्टेबल विक्रमयादव के पेट में गोली लग गई.
घायल होने के बाद भी जारी रखी जवाबी कार्रवाई
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विक्रम यादव ने साहस नहीं खोया.उन्होंने नक्सलियों कोअपनी स्थिति का अंदाजा नहीं होने दिया और लगातार सटीक जवाबी फायरिंग करते रहे.उनकेसाथियों के मुताबिक, “गोली लगने के बाद भी विक्रम के चेहरे पर डर नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्पझलक रहा था." उनकी बहादुरी और आक्रामक कार्रवाई की बदौलत अन्य जवानों को सुरक्षितपोजीशन लेने का मौका मिला और अंततः नक्सलियों को पीछे हटना पड़ा.
कई अभियानों में निभा चुके हैं अहम भूमिका
असम के तिनसुकिया निवासी विक्रम यादव पहले भी कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों काहिस्सा रह चुके हैं. उन्हें पूर्व में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा सम्मानित भी किया जाचुका है.साधारण परिवार से आने वाले विक्रम ने हमेशा देश सेवा को सर्वोपरि रखा है.
मुठभेड़ के बाद उन्हें तत्काल बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट किया गया. फिलहाल उनकीस्थिति स्थिर बताई जा रही है और उन्हें उन्नत चिकित्सा सुविधा दी जा रही है. विक्रम यादव कीवीरता ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों का मनोबल और भी ऊंचा कर दिया है.

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