Lagatar desk : यदि आप महसूस कर रहे हैं कि लोगों से घुलने-मिलने की इच्छा कम हो रही है, उदासी में रहने की आदत बन गई है, नींद और भूख पहले जैसी नहीं रही, तो ये मानसिक स्वास्थ्य के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
मन में अशांति के संकेत
छोटी-छोटी बातों पर अधीर होना
मूड स्विंग, कभी गुस्सा, कभी खुशी
किसी काम में मन का न लगना
इन संकेतों को नजरअंदाज करना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. यह तय करना महत्वपूर्ण है कि क्या आप इन भावनाओं को अपने स्वभाव का हिस्सा मानते हैं या इन्हें किसी के साथ साझा करना चाहते हैं.
आधुनिक जीवन और मानसिक दबाव
आज का जीवन अधिकतर मशीनों और डिजिटल डिपेंडेंसी पर आधारित है. इससे आत्म जागरूकता व्यवहार बढ़ता है और लगातार बेहतर करने का दबाव मानसिक तनाव को बढ़ाता है.विशेषज्ञों के अनुसार, हमें कभी-कभी थोड़ा ठहरकर अपने मन की स्थिति का आकलन करना चाहिए.
विकराल होती चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मानसिक स्वास्थ्य संकट को आपदा के रूप में घोषित किया है.
आर्थिक सर्वेक्षण में बच्चों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र
घरेलू समस्याएं, कार्यस्थल का तनाव, सामाजिक अलगाव और अकेलापन
ध्यान देने वाली बात: मानसिक समस्याएं अक्सर दृश्य नहीं होतीं, और हंसते हुए या सामान्य दिखने वाले लोग भी इनसे प्रभावित हो सकते हैं.
तनाव, गुस्सा और कार्टिसोल
गुस्सा और तनाव से शरीर में कार्टिसोल हार्मोन बढ़ता है लंबे समय तक उच्च स्तर पर रहने से इंसुलिन प्रतिरोध, मांसपेशियों की हानि और मोटापा जैसी समस्याएं हो सकती हैं
मन के ‘एंटीबॉडीज’
हंगरी के पाजिटिव साइकोलाजी प्रोफेसर एटिलिया ओलाह के अनुसार, मन के कई एंटीबॉडीज हैं जो नकारात्मक विचारों से सुरक्षा करते हैं. इनमें शामिल हैं -
सकारात्मक सोच
स्थिति पर नियंत्रण की समझ
रचनात्मक आत्मविचार
लक्ष्य की दिशा में ध्यान
भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता
दिनचर्या और सुधार के उपाय
माइंडफुलनेस अभ्यास: वर्तमान में ध्यान केंद्रित करना
एक्सरसाइज: जागिंग, स्वीमिंग, लंबी सैर
पर्याप्त नींद और संतुलित आहार
छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर सकारात्मक बदलाव लाना
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