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भोगनाडीह की घटना को लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश, पुतला फूंका

आदिवासी नेता अशोक बराइक ने कहा,30 जून 1855 को देश में पहली बार स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की थी.  उसी हुल दिवस पर सिद्धू-कान्हू को माल्यार्पण करने पहुंचे आदिवासियों पर लाठीचार्ज कर उन्हें लहूलुहान किया गया.
 

  Ranchi :  भोगनाडीह में हुई घटना के विरोध में  आदिवासी समाज के लोगों एवं भाजपा कार्यकर्ताओं ने आज संयुक्त रूप से विरोध मार्च निकालते हुए अलबर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया और मुर्दाबाद के नारे लगाये.

 

अध्यक्ष वरुण कुमार ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार खुद को आदिवासियों की सरकार बताती है, लेकिन उन्हीं के शासन में आदिवासियों पर लाठीचार्ज हो रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी.

 

अध्यक्ष  ने कहा कि उनके वंशजों को आज जुल्म सहना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि हथियार लाने की बात झूठी है. भोले-भाले आदिवासियों को फंसाया जा रहा है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.

 

आदिवासी नेता अशोक बराइक ने कहा,30 जून 1855 को देश में पहली बार स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी भड़की थी.  उसी हुल दिवस पर सिद्धू-कान्हू को माल्यार्पण करने पहुंचे आदिवासियों पर लाठीचार्ज कर उन्हें लहूलुहान किया गया.  

 

यह बेहद निंदनीय है.  हेमंत सरकार को मुख्यमंत्री आदिवासियों ने बनाया है और अब वही आदिवासी उन्हें पद से हटाने का काम करेंगे.

 

प्रदर्शन में प्रेम शाही मुंडा और गीता श्री उरांव समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए.  प्रदर्शनकारियों ने हेमंत सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की.

 

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