Rehan Ahmad Ranchi : दिसंबर माह में कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए लोग गर्म कपड़े, आग, बोरसी, रूम हीटर, गीजर, कंबल, रजाई का इस्तेमाल कर मजे-मजे जीवन गुजारते हैं. रईस इंसानों के साथ जानवर भी ठंड का पूरा मजा लेते हैं. वहीं गरीब एक तरफ पेट की आग बुझाने के लिए जद्दोजहद करता है, दूसरी ओर खुले आसमान के नीचे कड़कड़ती सर्दी में भी बिना कंबल के रात गुजारने को विवश हैं. इस संवाददाता को राजधानी स्थित बड़ा तालाब के निकट दो वृद्धा सड़क किनारे बुझती आग तापती दिखी,
पिछले बार तो कहीं से कंबल मिल गया था, इस बार नहीं मिला
उन्होंने कहा कि हमारी उम्र 65-70 के करीब पहुंच गयी है. हम ठंड से बचने के लिए आग ताप रहे हैं. हमारे पास कंबल तक नहीं है. 70 वर्षीय वृद्धा सुशीला ने कहा कि पिछले बार तो कहीं से कंबल मिल गया था. इस बार अभी तक कंबल नहीं मिला है. इस कारण परेशानी है. आग जलाने पर ठंड से कुछ राहत मिल जाती है. मालूम हो शहर में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो अपना जीवन फुटपाथ पर ही गुजारते हैं. दिन भर मजदूरी कर किसी तरह अपना पेट पालते हैं और रात में फुटपाथ पर बोरा एवं चादर के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं.
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बिल्ली परिवार के साथ कंबल में है सोती
दूसरी तरफ कुछ खुशनसीब जानवर हैं जो मजे का जीवन जीते हैं. मेन रोड निवासी मो जबिउल्लाह की बेटी को जानवरों से बहुत लगाव है. उन्होंने अपने घर में बिल्ली पाल रखी है, बिल्ली को बोतल से दूध पिलाया जाता है. उन्होंने कहा कि इसे सर्दी नहीं लगे, इसके लिए बेटी स्वेटर पहनाती है. कुछ दिन पहले इसकी तबीयत खराब हुई थी तो इसे डॉक्टर के यहां दिखाने गये थे. अभी ठीक है. यह इतनी समझदार है कि बिस्तर पर गंदगी नहीं करती है, बाहर दूसरी जगह पर लकड़ी का चौकोर पटरे पर बालू रखते हैं, बाथरूम जाना होता है, तो वहीं जाती है. यह हमारे साथ कंबल में ही सोती है.
खरगोश के भी ठाठ निराले...
हरमू निवासी माहम शामिया ने अपने घर में खरगोश पाला है, इसका नाम मोमो रखा है. जमीन में पटरा रख कर उसमें दरी बिछा कर खरगोश को बाक्स में रखते हैं. ठंड ना लगे इसके लिए स्वेटर भी पहनाते हैं. इसे बंधागोभी, गाजर, घास, सेब आदि फल तीन बार खिलाते हैं. घर के सारे लोग उलका पूरा ख्याल रखते हैं.
बकरियां परिवार का हिस्सा, बोतल से पिलाते हैं दूध
फारुकी स्ट्रीट के तारीफ फारुकी ने एक बकरी पाली थी, बकरी के चार बच्चे हैं. दो बच्चे बड़े हो गये, और दो बच्चों के जन्म के बाद मां गुजर गयी. इससे सारे घर के लोग काफी दुखी हो गये. अब तारीफ फारुकी, उनकी धर्म पत्नी, बेटी सुमैरा समेत पूरा परिवार बिना मां के बकरी के बच्चों का पूरा ख्याल रखते हैं. वे लोग बोतल से बच्चों को दूध पिलाते हैं. ठंड ना लगे इसके लिए स्वेटर पहनाते हैं. उन्होंने कहा कि जानवर भी प्यार के भूखे होते हैं, उन्हें प्यार मिले तो वे ठीक रहते हैं.
खालिक अपनी बकरियों को चना, रोटी, गेहूं खिलाते हैं
कर्बला चौक निवासी अब्दुल खालिक ने एक बकरी व एक बकरा पाला है. उन्होंने कहा कि इनका पूरा ख्याल किया जाता है. इन्हें घास, पत्तों के साथ रोटी, चना, गेहूं भी खिलाते हैं. ठंड ना लगे इसके लिए स्वेटर समेत कंबल व गर्म कपड़े पहनाते हैं.
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