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अनीता शेखर की किताब 'द सोलफुल जर्नी' का रांची में हुआ लोकार्पण

Ranchi : इविंस पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित प्रोफेसर अनीता शेखर की किताब "द सोलफुल जर्नी" 80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत में जम्मू और कश्मीर राज्य में वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित है. रांची स्थित प्रेस क्लब में एमिटी विश्वविद्यालय के छात्रों के एक समूह जिसमें देबश्री, माही, तन्वी, प्रेरणा, ट्विंकल, अनुष्का और त्रिशला द्वारा इस पुस्तक का विमोचन किया गया. इस राज्य के आतंकवाद के बारे में बहुत कुछ लिखा और छापा गया, लेकिन आम जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कभी खुलकर सामने नहीं लाया गया. इस किताब में एक ऐसी ही लड़की की कहानी है, जो राज्य में हुई हिंसा और आगजनी में मारे जाने के भय, चिंता और संकट में रहती है. जम्मू और कश्मीर में 80 और 90 के दशक के शुरुआती दौर में बड़े हो रहे बच्चों ने मानवता पर हुए हिंसक हमलों के कई झटके महसूस किए हैं, जिसने उनके आत्मविश्वास और अच्छे जीवन की चाह को झकझोर कर रख दिया. उग्रवाद की क्रूरता ने मानवीय मूल्यों और पड़ोसियों पर भरोसे को चकनाचूर कर दिया. लेखक, प्रोफेसर अनीता शेखर अपनी किताब में एक परी नाम की लड़की की एक बेहतरीन कहानी लिखी है, जिसे अपने माता-पिता के बिना घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है, साथ ही एक युवा लड़की की रूढ़िवादी समाज के संपर्क में आने पर होने वाली बाधाओं से लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. उसके लिए जीवन एक पहिए की तरह घूमता है. परी की कहानी मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं के इर्द-गिर्द घूमती है. यह किताब प्यार, रोमांस, भय, क्रोध, खुशी और पीड़ा को उजागर करती है और विभिन्न परिस्थितियों के बारे में बात करती है. इस किताब में सबसे अच्छी बात यह है कि यह किसी घटना के बारे में आलोचनात्मक नहीं थी. किताब में विभिन्न प्रसंगों वर्णन इस तरह से है, जो आंखें खोल देने वाली है. यह किताब उनके लिए भी है, जिन्होंने कभी नहीं जाना कि कश्मीरी समुदाय किस दौर से गुजरा है और मानवीय विरोध का चेहरा कितना क्रूर था. कहानी में घाटी के प्रभावित परिवारों में से एक को दिखाया गया है, जिन्हें उनकी गलती के बिना अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था. लेखक द्वारा खोजी गई यह विशेष कहानी सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जिसमें गोपनीयता का भी विशेष ध्यान रखा गया है. प्रोफेसर अनीता शेखर अंग्रेजी साहित्य में मास्टर कर चुकी हैं. साथ वह वर्तमान में झारखंड के एमिटी विश्वविद्यालय (एयूजे) में अंग्रेजी साहित्य और संचार पढ़ा रही हैं. इससे पहले वह मारवाड़ी कॉलेज और प्रबंधन संस्थान, रांची के एमबीए विभाग के साथ एक संकाय के रूप में जुड़ी हुई थीं. प्रोफेसर अनीता शेखर प्रतिष्ठित संस्थानों में संचार कौशल के विभिन्न पहलुओं में पेशेवरों को पढ़ाती और प्रशिक्षित करती रही हैं. वह पहले मारवाड़ी कॉलेज, रांची के प्लेसमेंट सेल के सदस्य के रूप में अपनी सेवा दे चुकी हैं, और राष्ट्रीय कार्मिक प्रबंधन संस्थान, कोलकाता की सदस्य भी हैं. उनका पसंदीदा विषय अंग्रेजी साहित्य है. उनका दृढ़ विश्वास है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात कहने और खुद को अभिव्यक्त करने के लिए स्थान प्रदान किया जाना चाहिए. वह बड़े सपने देखती है और घर के दरवाजे तक ही सीमित रहने के बजाय बड़े पैमाने पर समाज के लिए काम करना चाहती है. वह भारतीय समाज में `महिलाओं` के सशक्तिकरण की पुरजोर वकालत करती हैं. इसे भी पढ़ें : बड़ी">https://lagatar.in/bakoria-case-cbi-submits-closure-report-to-court-relatives-of-deceased-said-will-fight-till-supreme-court/">बड़ी

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