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घोषणा पर घोषणा : मगर डैम-जलाशय में फ्लोटिंग सोलर प्लांट नहीं लगे

  • विगत पांच सालों से रांची के गेतलसूद समेत तीन दर्जन से अधिक डैमों पर हुई फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की घोषणा
  • इस बजट में फिर सरकार ने फिर किया घोषणा, 100 करोड़ रूपए के किए गए प्रावधान
Kaushal Anand Ranchi : ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने के लिए उर्जा विभाग ने कई तरह की घोषणाएं की. मगर घोषणा-घोषणा ही बन कर गयी. तीन दर्जन से अधिक जलाशय एवं डैमों में सौर उर्जा के तहत बिजली उत्पादन के लिए फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने थे. मगर पांच साल बीतने के बाद भी एक जगह भी अब तक एक प्लांट भी नहीं लगाया जा सका है. इस बार फिर सरकार ने इसको लेकर वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसको लेकर घोषणा की है. इसके लिए नए वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है और कई तरह के दावे किए गए हैं. यह पूरा काम पीपीपी मोड पर होना है. सरकार ने कुल फ्लोटिंग सोलर से दो हाजार मेगावाट तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है. बतातें चलें कि झारखंड में वर्तमान में डीवीसी कमांड एरिया को लेकर कुल 2500 से 3000 मेगावाट बिजली की खपत है. अगर केवल 2 हजार मेगावाट सोलर से बिजली आनी शुरू हो जाए तो झारखंड बिजली क्षेत्र में बिना थर्मल पावर के आत्मनिर्भर बन जाएगा.

यह है योजना, अभी तक क्या है स्थिति

  • राज्य में 365 दिन में करीब 300 दिन सूर्य की रौशनी रहती है. झारखंड सोलर इनर्जी उत्पादन के लिए बेस्ट भौगोलिक परिस्थिति के रूप में चिन्हित हुआ है. इसलिए यहां पर सोलर इनर्जी क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं.
  • इसको देखते हुए राज्य के करीब तीन दर्जन से अधिक डैम और जलाशयों में नयी सोलर पॉलिसी के तहत फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की योजना है.
  • कुल 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन फ्लोटिंग सोलर प्लांट से लक्ष्य तय
  • पीपीपी मोड पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई रियायतों की घोषणा की गयी. जिसमें वर्ष 2027 तक कुल 5200 करोड़ रूपए निवेश प्राप्त करने की घोषणा हुई है.
  • इसके तहत पीपीपी मोड पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए करीब 31 जलाशय चिन्हित हुए. जिसमें डैम, नहर, कैनाल आदि शामिल हैं.
  • रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट का फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाने की घोषणा 2017 में हुई. इसके लिए डैम का विजीविलिटी टेस्ट भी करा लिया गया. डैम के ऑथेरिटी जलसंसाधन विभाग ने इसके लिए एनओसी भी दे चुका है. जेबीवीएनएल और सेकी (सोलर इनर्जी कोरपोरेशन ऑफ इंडिया) के बीच करार 2020 में एग्रीमेंट भो हो चुका है. सेकी विश्व बैंक के सहयोग से करीब 800 करोड़ रूपए में पीपीपी मोड पर प्लांट लगाएगा. मगर अब तक इसका टेंडर तक जारी नहीं किया जा सका है.
  • चांडिल डैम में 600 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जाना है. मगर अब तक धरातल पर कोई काम नहीं हुआ.
  • तेनुघाट डैम में 400 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जाना है. अभी प्रकियाधीन है.
  • बोकारो और गुमला में उपरी शंख डैम में फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाए जाने का प्रस्ताव विभाग के पास भेजा गया है जो अभी लंबित है.

डीवीसी अपने कमांड एरिया में 2200 मेगावाट का सोलर एवं फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाएगा

डीवीसी भी सोलर इनर्जी के क्षेत्र में हाथ अजमाने का निर्णय लिया है. डीवीसी करीब 2200 मेगावाट सौर उर्जा उत्पादन करने का लक्ष्य तय किया है. डीवीसी अपने कमांड एरिया में 2200 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए कई एरिया को चिन्हित किया है. डीवीसी ने इसका डीपीआर तैयार भी कर लिया है. डीवीसी अपने कमांड एरिया मैथन, तिलैया और पंचेत डैम में करीब 600-600 मेगावाट का फ्लोटिंग पावर प्लांट लगाएगा. जबकि कोनार डैम में 200 मेगावाट की क्षमता का प्लांट लगाएगा. वहीं करीब 200 मेगावाट खाली पड़े भूखंडों में सोलर प्लेट के माध्यम से बिजली उत्पादन करेगा. डीवीसी ने डीपीआर तैयार करके केंद्रीय विद्युत मंत्रालय को भेज दिया है.

विभागीय प्रक्रिया में थोड़ा विलंब होता है

ज्रेडा और जेबीवीएनएल के अधीन चिन्हित सभी जलाशयों में इस साल फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट पर काम शुरू हो जाएगा. विभागीय प्रक्रिया में थोड़ा विलंब होता है. इस साल गेतलसूद में प्लांट लगाने का काम शुरू हो जाएगा. बाकी अन्य जगहों पर प्रकिया जारी है.

-केके वर्मा, निदेशक, ज्रेडा

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