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आरोग्यम स्कैम में एक और नया खुलासा, खासमहाल के जमीन की जिला परिषद ने बदल दी प्रकृति

 
पिछले 15 वर्षों से बगैर लीज की है आरोग्यम को दिए गए तीनों भवनों की जमीन हर दिन गुजरते रहे पदाधिकारी, सुबह-शाम चलता रहा काम, जमीन निकला सरकारी सरकारी खाते में रिज्यूम्ड लैंड है चपाड़ का इकलौता भूखंड चौथी बिल्डिंग की जमीन की प्रकृति का जिक्र सरकार के रिकॉर्ड में भी है मौजूद Ranchi : हजारीबाग में खासमहाल के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जाती रही है. जिला परिषद हजारीबाग की ओर से डिस्ट्रिक्ट चौराहे के निकट प्राइम लोकेशन पर एचबीजेड आरोग्यम सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को सौंपे गए तीनों भवनों की जमीन खासमहाल की है. वर्ष 2008 तक यह जमीन लीज पर थी. यह जमीन जिला परिषद को आवासीय भूखंड के रूप में आवंटित थी. अब पिछले 15 वर्षों से यह भूमि बगैर लीज के ही है. पूर्व में भी यह जमीन जिला परिषद के अध्यक्ष व सचिव के नाम पर आवंटित रहा है, न कि जिला परिषद कार्यालय के नाम पर. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि बिना अधिकार के जिला परिषद बोर्ड की ओर से उल्लेखित भूमि किसी अन्य को सबलीज पर देना कहां तक जायज है ? जैसा कि इस मामले में कहा जा रहा है कि जिला परिषद ने नियम सम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत जमीन को सौंपा है. ऐसे में व्यवसायिक उपभोग के लिए निजी हाथ में उस आवासीय जमीन को सौंपना, जो जिला परिषद का कभी रहा ही नहीं और किस्म भी व्यवसायिक नहीं थी, उसे कैसे दिया गया? फिर नियमों को ताक पर रखकर परियोजन परिवर्तन कर उस जमीन को निजी हाथों में सौंपना स्पष्ट दर्शाता है कि किसी खास को मदद पहुंचाने की यह सोची-समझी रणनीति थी. उस पर भी सवाल यह है कि यह जमीन आवासीय थी, तो उसे व्यवसायिक उद्देश्य के लिए जिला परिषद ने कैसे इस्तेमाल के लिए किसी एक हाथ को सौंप दिया? दूसरी चौंकानेवाली बात यह है कि जिस चौथे भवन पर अधिकार जताने की कोशिश की जा रही है, वह चपाड़ ग्राम के अंतर्गत आनेवाली खासमहाल की एकमात्र रिज्यूम्ड जमीन है. यह बकायदा सरकार की वेबसाइट पर अपलोड भी है. इसकी होल्डिंग संख्या-17, प्लॉट संख्या-59 और रकवा-एक एकड़ 41 डिसमिल है. दिलचस्प बात यह है कि हर दिन इधर से अधिकारी गुजरते रहे, रोज सुबह-शाम काम चलता रहा, लेकिन किसी ने इस मामले पर संज्ञान लेने की जरूरत नहीं समझी कि सरकारी जमीन पर निजी काम कैसे कराया जा रहा है. इसके पीछे की बात यह कही जा रही है कि बाद में येन-केण-प्रकारेण इस चौथे भवन को भी अपने अधीन कर लिया जाए और सच पर पर्दा पड़ा रहे.

आवंटित भूमि का प्रकार लीजधारी बदल ही नहीं सकता : डीसी

[caption id="attachment_567210" align="alignleft" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/dc-nanci-sahay-21_192-300x167.jpg"

alt="डीसी नैंसी सहाय" width="300" height="167" /> डीसी नैंसी सहाय[/caption] डीसी नैंसी सहाय ने कहा कि आवंटित भूमि का प्रकार लीजधारी बदल ही नहीं सकता. इसकी एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें खासमहाल पदाधिकारी डीसी को फाइल बढ़ाते हैं और फिर कमिश्नर से होते हुए यह स्टेट पहुंचता है. फिर वहां से किस्म बदलने के आदेश दिए जाते हैं. चूंकि जमीन की किस्म बदल जाने से राजस्व का भी निर्धारण होता है. इसलिए यह प्रक्रिया लंबी होती है. चूंकि यह मामला राजस्व से संबंधित होता है. ऐसे में जिला परिषद में अगर लीज की किस्म को बदलकर आवंटित किया गया है, तो यह गलत हुआ है. [wpse_comments_template]
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