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NTPC की चट्टी बरियातु कोल परियोजना में एक और आदिम जनजाति गीता बिरहोर की मौत

Ranchi: एनटीपीसी के चट्टी बरियातु कोयला खनन परियोजना के लिए खनन कार्य कर रही कंपनी ऋत्विक-एएमआर द्वारा खनन के दुष्प्रभाव से आदिम जनजाति समुदाय के दुर्गा बिरहोर और किरणी बिरहोर की पूर्व में मौत हुई थी. अब एक बार फिर से शुक्रवार को देर रात्रि पगार बिरहोर टोला निवासी विफा बिरहोर की 34 वर्षीय पत्नी गीता देवी बिरहोर की मौत हो गई है. मृतका के एक पुत्र और तीन पुत्रियां हैं. बताया जाता है कि कुछ दिनों से उसे सांस में दिक्कत थी और खून की उल्टी भी हो रही थी. परिजनों ने उसे शेख भिखारी मेडिकल अस्पताल में दिखाया भी, लेकिन समुचित इलाज नहीं होने के कारण उसकी मौत हो गई. ज्ञात हो कि उक्त परियोजना खुलने के बाद से ही विवादों में रही है. आरोप है कि एनटीपीसी खनन, पर्यावरण एवं आम जनजीवन के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करके आनन-फ़ानन में खनन कार्य चालू कर दिया था. जिसके बाद से अब तक आदिम जनजाति समुदाय के तीन लोगों की मौत हो चुकी है. गीता बिरहोर की मौत ऐसे समय मे हुआ है जब मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त कदम उठाया है. आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए एनटीपीसी के सीएमडी और हज़ारीबाग़ डीसी से स्पष्टीकरण मांगा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह कहा है कि बेशक एनटीपीसी के द्वारा खनन किया जा रहा है, जबकि यह उचित नहीं है. मामले के तथ्य और संयुक्त निरीक्षण समिति की रिपोर्ट आयोग को यह मानने के लिए बाध्य करती है कि एनटीपीसी और जिला प्रशासन ने बिरहोर आदिवासियों के जीवन और कल्याण पर खनन गतिविधि को प्राथमिकता दी है. समस्याओं और जानमाल के नुकसान के बावजूद चट्टी बरियातु खनन परियोजना में खनन कार्य बेरोकटोक जारी है. बिरहोर समुदाय के जीवन के अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है. आयोग की टिप्पणी से एनटीपीसी और जिला प्रशासन में सनसनी गीता बिरहोर की मौत महज कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एनटीपीसी के सीएमडी को निर्देश दिया था कि वो चार सप्ताह के भीतर आयोग को चट्टी बरियातु खनन परियोजना में खनन कार्य जारी रहने के कारणों से अवगत कराएं, जबकि विधिवत गठित समिति ने बिरहोरों को परेशान करने वाले स्वास्थ्य और अन्य मुद्दों की पहचान करने के बाद बिरहोरों को स्थानांतरित किए जाने तक खनन कार्य को रोकने की सलाह दी है. वे आयोग को यह भी सूचित करेंगे कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करने से पहले सामाजिक प्रभाव आकलन किया गया था या नहीं. यदि हां, तो इसका विवरण भी आयोग को भेजा जाए. वहीं हजारीबाग के उपायुक्त को निर्देश दिया जाता है कि वे संयुक्त समिति के निष्कर्षों और टिप्पणियों पर जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में चार सप्ताह के भीतर आयोग को सूचित करें. संयुक्त समिति कि रिपोर्ट पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का निष्कर्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को हज़ारीबाग़ डीसी के द्वार गठित एसडीएम सदर की रिपोर्ट एवं संयुक्त समिति ने स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया था. आयोग द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर आयोग ने अपने निष्कर्ष में पाया कि एनटीपीसी चट्टी बरियातु कोयला खनन परियोजना दिनांक 25 अप्रैल 2022 को शुरू हुई, बिरहोर टोला, जो पगार गांव में पड़ता है, में 33 घर हैं. इनमें से 04 घर, जो खनन स्थल के नजदीक हैं, जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं. बिरहोर टोला के निवासी भारी धूल के कारण बीमारियों से ग्रसित पाए जाते हैं. खांसी के साथ बुखार, श्वास नली में संक्रमण आदि अक्सर देखे जाते हैं. यह भी बताया गया है कि एनटीपीसी द्वारा 25 फीट ऊंचा हरित जाल बनाया गया है. बिरहोर टोला, पगार में पेड़ लगाए गए हैं और अन्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं. अधिकांश बिरहोरों ने ढेंगा बस्ती, बड़कागांव जाने से इनकार कर दिया है. उनके लिए भूमि की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है. खनन कार्य शुरू होने के बाद दुर्गा बिरहोर और किरण कुमारी नामक दो व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है. संयुक्त समिति ने पाया है कि विस्फोट कार्य के कारण बिरहोरों के घर नष्ट हो रहे हैं. उन्होंने यह भी पाया है कि जब तक बिरहोरों को स्थानांतरित नहीं किया जाता है, तब तक खनन कार्य उचित नहीं है, आयोग ने रिपोर्ट पर विचार किया है. बेशक, एनटीपीसी द्वारा खनन कार्य किया जा रहा है, जबकि यह उचित नहीं है. संयुक्त समिति की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि करती है. इसे भी पढ़ें – बांग्लादेश">https://lagatar.in/our-hindu-brothers-and-sisters-are-being-tortured-in-bangladesh-modi-government-has-failed-mallikarjun-kharge/">बांग्लादेश

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