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विधानसभा में एंटी मॉब लिंचिंग विधेयक पास, अब सश्रम आजीवन कारावास और 25 लाख तक जुर्माना

Ranchi: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भीड हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक पास हो गया है. राज्य में मॉब लिंचिंग रोकने के लिए यह विधेयक लाया गया है. विधेयक में कड़े कानून का प्रावधान किया गया है. अगर लिंचिंग से पीड़ित व्यक्ति की मौत हो जाती है तो आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास के साथ 5 लाख रुपये जुर्माना की सजा मिलेगी. जुर्माना की राशि 25 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है. संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने विधेयक को सदन में रखा. जिसपर स्पीकर ने मतदान कराया और सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने अपना मत रखा.

अधिकारियों के नॉलेज पर सदन में उठे सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान BJP ने जमकर हंगामा किया. BJP के विधायक वेल तक पहुंच गए. उन्होंने इस कानून सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप भी लगाया. पार्टी के तीन विधायकों अमर बाउरी, अमित मंडल और रामचंद्र चंद्रवंशी ने संशोधन प्रस्ताव भी लाये. विधायक अमित मंडल ने कहा कि सरकार का ये काला अध्याय पूरे झारखंड में लिखा जाएगा. उन्होंने इसे तैयार करने वाले अधिकारियों नॉलेज पर भी सवाल उठाया. कहा कि इसमें भीड़ को अंग्रेजी में मॉब लिखा गया है और उसके बारे में कहा गया है कि दो या दो से अधिक. किस आधार पर दो व्यक्ति को मॉब लिखा गया है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने सरकार को खुश करने के लिए यह कारनामा किया है. उन्होंने विधेयक में दुर्बल शब्द की भी व्याख्या करने की मांग की. वहीं बीजेपी विधायक अमर बाउरी ने कहा कि यह बिल विशेष वर्ग की तुष्टीकरण के लिए आदिवासी भाइयों को सूली पर चढ़ाने वाला है. अनंत ओझा ने कहा कि तुष्टिकरण के लिए यह बिल लाया गया है. बिल का दुरुपयोग होगा.

2014 के पहले मॉब लिंचिंग कोई नहीं जानता था- दीपिका

कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने भी कहा है लिंचिंग शब्द को 2014 से पहले कोई नहीं जानता था. बीजेपी की सरकार में लिंचिंग का दाग लगा है. उन्होंने कहा कि झारखंड में भी पिछली सरकार ने लिंचिंग का दाग लगाया है. अब जब इसपर कड़ा कानून बन रहा है तो इन्हें दिक्कत हो रही है. इसपर बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कहा कि दीपिका को पूछना चाहिए कि 1984 का सिख विरोधी दंगा मॉब लिंचिंग था या नहीं. इसे भी पढ़ें- जब">https://lagatar.in/when-pakistani-player-praised-rohit-sharma-fans-of-both-countries-clashed-on-social-media/">जब

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दुर्बल व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों की होगी रक्षा- सीएम

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य के दुर्बल व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और भीड़ द्वारा हिंसा एवं लिंचिंग को रोकने के लिए यह विधेयक पास किया जाना जरूरी है.

मॉब लिंचिंग की सजा

झारखंड में अब मॉब लिंचिंग से किसी की मौत हो जाती है तो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिलेगी. इसके साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है. जुर्माना की राशि 25 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है. वहीं लिंचिंग में किसी को हल्की चोट आती है तो दोषी को एक अवधि तक के लिए जेल की सजा होगी, जिसे तीन वर्षों के लिए बढाया जा सकता है. साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा, जो तीन लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है. लिंचिंग में गंभीर चोट आने पर आरोपी को आजीवन कारावास या एक अवधि तक के लिए कारावास दी जाएगी, जो 10 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है. वहीं 3 लाख से 5 लाख तक का जुर्माना भी लगेगा. इसे भी पढ़ें- 30">https://lagatar.in/mistake-of-30-crores-4-arrested-including-registrar-of-magadha-university/">30

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