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कोयले के अवैध कारोबार में अनुप माजी उर्फ लाला का साम्राज्य बंगाल से झारखंड तक

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  • लाला का सिंडिकेट 2015 से ही ECL के बंगाल और झारखंड के लीज क्षेत्र में अवैध खनन में लिप्त था.
  • लाला के सिंडिकेट में झारखंड के कोयला व्यापारी भी शामिल, 1340.27 करोड़ का अवैध खनन किया. 
  • झारखंड का मुगमा, एसपी माइंस, राजमहल एरिया, ECL के लीज क्षेत्र में है, यहां भी अवैध खनन हुआ.

Ranchi : कोयले अवैध कारोबार में अनुप माजी उर्फ लाला का साम्राज्य बंगाल से बिहार तक कायम था. उसने ECL (Eastern Coalfields Limited) के पश्चिम बंगाल और झारखंड के लीज क्षेत्र में अवैध खनन किया. लाला के सिंडिकेट ने ECL के लीज क्षेत्र से 1340.27 करोड़ रुपये के कोयले का अवैध खनन किया. उसके कोल सिंडिकेट में झारखंड के कोयला व्यापारी भी शामिल है. ECL कोयला घोटाले में ईडी और सीबीआई की जांच रिपोर्ट नें इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.

 

ECL के लीज क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में सबसे पहले सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की. इसमे अनुप माजी उर्फ लाला के अलावा ECL और CISF के अधिकारियों का अभियुक्त बनाया गया था. सीबीआई द्वारा वर्ष 2020 में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ED ने मनी लाउंड्रिंग की जांच शुरु की. केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की गयी जांच में इस बात की जानकारी मिली की लाला का सिंडिकेट 2015 से ही ECL के बंगाल और झारखंड के लीज क्षेत्र में अवैध खनन में लिप्त था. लेकिन लाला के खिलाफ अवैध खनन या ढुलाई के आरोप में स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी नहीं दर्ज की थी.

 

जांच में पाया गया कि लाला के सिंडिकेट ने ECL के लीज क्षेत्र के काजोरा, कुनुस्तोरिया, श्रीपुर, सतग्राम, पंडावेश्वर, सालनपुर, सोदेपुर, मुगमा, एसपी माइंन एरिया और राजमहल में अवैध खनन किया. झारखंड का मुगमा, एसपी माइंस, राजमहल एरिया, ECL के लीज क्षेत्र में है. लाला के सिंडिकेट द्वारा किये गये अवैध खनन का मूल्यांकन CMPDIL के विशेषज्ञों द्वारा नमूना के तौर पर कराया गया. इसमें लाला सिंडिकेट द्वारा 30.97 लाख एमटी कोयला के अवैध खनन का मामला पकड़ में आया. 

 

लाला सिंडिकेट द्वारा अवैध खनन से निकाले गये कोयले का मूल्य 1340.27 करोड़ रुपये आंका गया. लाला ने ECL के लीज क्षेत्र से अवैध खनन कर निकाले गये कोयले को ECL के ईलाके में जमा किया और ECL के रेलवे साइडिंग का इस्तेमाल कर कोयले के दूसरी जगह भेजा. इसमें ECL के अधिकारियों के अलावा ECL की सिक्यूरिटी और CISF ने उसके मदद की.

 

जांच में पाया गया कि लाला सिंडिकेट ने ECL के लीज क्षेत्र में अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध खनन करने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें लगा रखी थी. इससे ऐसा लगता था कि ECL ही अपने लीज क्षेत्र में वैध तरीके से माइनिंग कर रही है. 

 

सड़क के रास्ते अवैध कोयले की ढुलाई के लिए लाला द्वारा जारी ट्रांसपोर्ट चालान का इस्तेमाल किया जाता था. इसे लाला पैड के नाम से जाना जाता था. सड़क से कोयले की ढुलाई के लिए लाला ने धनबाद, निरसा के फर्जी पते पर कई ट्रांसपोर्ट कंपनियां बना रखी थी. इन कंपनियों में मेसर्स जगन्नाथ रोड लिंक, मेसर्स फ्लाइंग जेट, मेसर्स राज लक्ष्मी, मेसर्स नार्थ साउथ, मेसर्स बीरबल, मेसर्स प्रह्लाद, मेसर्स चाईना वान, मेसर्स समशेर, मेसर्स कल्याण सहित अन्य कंपनियों का नाम शामिल है. इन कंपनियों के इस्तेमाल अवैध कोयला कारखानों को बेचने के लिए किया जाता था.

 

लाला ने सड़क मार्ग से अवैध कोयले की ढुलाई के लिए अपनी एक अलग टीम बना रखी थी. इसमें आसपास के गांव के युवाओं को शामिल किया था. इन युवाओं को कोयले की ढुलाई पर नजर रखने के लिए लाला ने बोलेरो और इनोवा जैसी गाड़ियां दे रखी थी. कोयले की ढुलाई पर नजर रखने वाले इस ग्रुप को लाला ने पुलिस के वाट्सएप नंबर से जोड़ रखा था. 

 

कोयले की ढुलाई पर नज़र रखने वाले इन युवाओं की ताक़त का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह ग्रुप ECL के वैध कागज पर कोयले की ढुलाई करने वाले ट्रकों से भी पैसा वसूल लेता था. लाला का यह ग्रुप रात को गश्ती के दौरान ट्रकों को रोक कर ट्रांसपोर्ट चालान  “लाला पैड” की जांच करता था. जिस ट्रक के पास लाला पैड नहीं रहता था उससे पैसों की वसूली करता था.

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