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अनुपम के बहाने- वह युवा है, तो परम मूर्खता भी..

वह युवा है, तो परम मूर्खता भी..क्योंकि दुनिया का फुल सर्कल घूम जाना, ही एक मात्र स्थिर सत्य है. कल वह सत्ता में आ सकता है. आपके दल या आईडियोलॉजी में इफेक्टिव जगह पर बैठा हो सकता है. तब कितने ट्वीट और पोस्ट डिलीट करोगे, हर प्रोफाईल से स्क्रीनशॉट निकलेगा. और फिर, आपकी गाथा भी शुरू होने के पहले ही अनुपम गति को प्राप्त होगी.
 

Manish Singh

ये कोई अनुपम बाबू हैं. बिहार की किसी सीट से टिकट मिला था. युवा है, फोटो में 30-40 साल के दिख रहे हैं. तेरह-चौदह साल पहले 25-28 के रहे होंगे. तो बुद्धि भी उतनी ही रही होगी. उस वक्त राहुल गांधी को डिजास्टर, सोनिया गांधी को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट और प्रियंका गांधी पर यौन छींटाकशी करते ट्वीट वाइरल हो गए. तब यह फैशन था, नया फैशन था. नेताओ को व्यक्तिगत गाली, गंदी छींटाकशी, घटिया, मेजोगाईनिस्ट बाते बोलना, बड़ी ही वीरता वाला क्रांतिकारी कर्म था.

 

आज दुनिया फुल सर्कल घूम गयी. अनुपम बाबू को दुनियादारी की सच्चाइयां समझ आ गयी. इस दौरान उन्होंने अच्छे सामाजिक काम किये, नाम कमाया. कांग्रेस से जुड़े टिकट के योग्य भी पाया गया. और जैसे ही टिकट मिला, उनके हाथों से डिजिटल पत्थरों पर ब्राह्मी लिपि में लिखे शिलालेख खोद निकाले गए. जाहिर है ये काम किसी राजनीतिक विरोधी ने ही किया होगा, वर्ना फुर्सत किसे है. टिकट हाथ से निकल गया. भईया जी चौमू बनकर रह गए. 14 साल पहले के जोशीले घटिया शब्दों ने करियर चौपट कर दिया. 

 

इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है? पहली- लिखें, तो विषय पर, मुद्दों पर, लिखें. कल को नौबत आये तो उसपे स्टैंड बदलना, जस्टिफाई करना आसान होता है.  दूसरी- हर हाल में व्यक्तिगत छींटाकशी, यौन शब्दावली से बचें. बात चुनाव लड़ने की ही नही है, वह आपके सामान्य निजी जीवन, सोच और निजी संपर्क में भी आपकी छवि को प्रभावित करती है. (करना है तो फर्जी आईडी बना लें. लेकिन उसे कोई सीरियस लेता नही. इम्पेक्टलेस मेहनत है). तीसरी- किसी नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी न करें. मृत नेताओ में गांधी, नेहरू, इंदिरा, राजीव, कुछ हद तक अटल, अपनी आईडियोलॉजी के दुरुस्त झंडे है. इनके नाम के साथ लीचड़बाजी न करें. चौथी- जिंदा नेता के साथ खूब लीचड़पन करें, बशर्ते वो 70 के आसपास का हो, जो अपने करियर के प्राइम पर हो (जिसके आगे ढलान है) या ऑलरेडी ढलान पर हो और पांचवीं- अगर वह सत्ता में है, तो उसकी आलोचना रियल वीरता है. अगर नही है, तो याद रहे, सत्ताविहीन नेता मरे कुत्ते के बराबर होता है. उसपे लात मारना हाई लेवल की कायरता है. 

 

वह युवा है, तो परम मूर्खता भी..क्योंकि दुनिया का फुल सर्कल घूम जाना, ही एक मात्र स्थिर सत्य है. कल वह सत्ता में आ सकता है. आपके दल या आईडियोलॉजी में इफेक्टिव जगह पर बैठा हो सकता है. तब कितने ट्वीट और पोस्ट डिलीट करोगे, हर प्रोफाईल से स्क्रीनशॉट निकलेगा. और फिर, आपकी गाथा भी शुरू होने के पहले ही अनुपम गति को प्राप्त होगी. 

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