alt="" width="1600" height="1200" /> ऐसा नहीं है कि अनुपम को डर नहीं लगता है, लेकिन झारखंड में पाये जाने वाले अधिकतर सांप विषैले नहीं होते हैं लेकिन कुछ विषैली प्रजातियां भी हैं. इन्हें सांपों को पकड़ने के लिए अक्सर वन विभाग से फोन कर बुलाया जाता है. अनुपम को सांपों से लगाव बचपन से है, इस वजह से वह सांपों को मारने नहीं देते हैं और स्वयं रेस्क्यू कर उनकी जान बचाते हैं. यदि किसी के घरों में जहरीले सांप निकलते हैं और अनुपम को इसकी जानकारी होती है तब वो अपनी जान की परवाह किये बिना सांप को पकड़ते हैं.
alt="" width="1120" height="540" /> अनुपम सांपों को पकड़ने के बाद चोटिल सांपों का प्राथमिक उपचार कर जंगलों में और ओरमांझी के सांप घर मे छोड़ देते हैं. सांप ज्यादातर बरसात के मौसम में बिलों में पानी भरने के कारण बाहर निकल कर घरों में घुस जाते हैं, जिस कारण बरसात के दिनों में सर्पदंश की घटनाएं अक्सर सुनने को मिलती हैं. सांप अपने बचाव में हमला करते हैं इसलिए सांपो को छेड़ना नहीं चाहिए. झारखंड में पाये जाने वाले ज्यादातर सांप रसैल वाईपर, करैत, कोबरा, रैट स्नेक, धोड़, धमन, कराइट, कॉमन करैत आदि हैं. अनुपम बताते हैं कि यदि किसी को सांप काट ले तो उपचार के तौर पर घाव को पानी से अच्छी तरह साफ कर लें, जिस जगह सांप ने काटा है उस जगह कपड़े से या रस्सी से हल्का बांधे और तुरंत डॉक्टर के पास उपचार के लिए जाएं सांप के काटने पर झाड़-फूंक के चक्कर पर बिल्कुल ना पड़ें
alt="" width="819" height="1718" /> आज भी कोलेबिरा के पंचम प्रसाद के घर से रेस्क्यू कर एक सांप को पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया. साथ ही उन्होंने बताया की कोलेबिरा निवासी पंचम प्रसाद के यहां यह तीसरा मामला है जब उन्होंने सांप को पकड़ा, इससे पहले भी वह दो बार जहरीले सांप को पकड़कर लोगों की जान बचाई है सरकार की तरफ से इस काम के लिए कोई भी सुविधा या सम्मान नहीं मिलती है और ना बढ़ावा दिया जाता है. जिससे और लोग जागरूक होकर इस तरह के काम में अपनी प्रतिभा बढ़ा सकें. बताते चलें इन दिनों सिमडेगा और गुमला जिले में सर्पदंश के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. जिससे कई लोगों की जान चली जा रही है. फिर भी लोग इसके प्रति गंभीर और सजग नहीं हैं. [wpse_comments_template]

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