कैंप स्थापित होने से गांव का माहौल बिगड़ रहा है
इन्होंने कहा कि कई गांवों में बिना सहमति के कैंप स्थापित होने के बाद गांव-समाज में फूट पड़ रही है. गांव का माहौल बिगड़ रहा है. कैंप के आसपास विदेशी शराब गैर-कानूनी तरीके से बिकने लगी है. आदिवासी अपनी परंपरा के अनुसार पूजा भी नहीं कर पा रहे हैं. समाज में हो रहे शोषण-अत्याचार के विरोध में अपनी प्रतिक्रिया देने वाले ग्रामीणों को माओवादियों के समर्थक के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा बलों के डर से ग्रामीण ग्राम सभा तक नहीं कर पा रहे हैं. परिस्थिति अत्यंत दुखद और चिंतनीय है. हो आदिवासी सदियों से अपने स्वाभिमान और जल, जंगल, जमीन व प्रकृति के साथ खुले मन से जीते रहे हैं. लेकिन आज वे अपने ही क्षेत्र में कैदी जैसा जी रहे हैं. निर्दोष आदिवासी युवाओं पर पुलिस द्वारा फर्जी मामले दर्ज किये जा रहे हैं. उन्हें बिना वारंट के कई दिनों तक थाना व कैंप में रखा जा रहा है. ग्रामीण स्थानीय अधिकारियों व विधायकों से कई बार गुहार लगा चुके हैं.हिंसा में ग्रामीण-आदिवासी पिस रहे हैं
माओवादियों और सुरक्षा बलों की हिंसा के बीच आम आदिवासी पिस रहे हैं. झारखंड जनाधिकार महासभा दोनों पक्षों से अपील करती है कि उनकी लड़ाई में आम ग्रामीणों पर हिंसा न हो एवं आम ग्रामीणों के जीवन को बर्बाद न किया जाए. प्रशासन व पुलिस से मांग है कि बिना ग्राम सभा की सहमति के सुरक्षा बलों के कैंप न लगाए जाएं. मात्र संदेह के आधार पर या माओवादियों को खाना खिलाने के कारण आदिवासी युवाओं को माओवादी हिंसा के मामले से न जोड़ा जाए. मुख्यमंत्री से इन गांवों के ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उन्हें इस स्थिति से मुक्ति दिलाने की विशेष अपेक्षा है. इसे भी पढ़ें – JEE">https://lagatar.in/better-performance-of-newton-tutorial-in-jee-mains-2023-aniket-kumar-got-99-75/">JEEMains 2023 में न्यूटन ट्यूटोरियल का बेहतर प्रदर्शन, अनिकेत कुमार को मिला 99.75 % [wpse_comments_template]

Leave a Comment