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आदेश पर मनमानी भारी : रसूखदार लेखापालों के सामने बेबस शिक्षा पदाधिकारी

 
Amarnath Pathak Hazaribagh : हजारीबाग में शिक्षा विभाग बेलगाम हो चुका है. यहां कोई किसी की नहीं सुनता है. ऐसे ही शिक्षा पदाधिकारी पर दो लेखापालों की मनमानी भारी पड़ रही है. रसूखदार लेखापालों के सामने विभागीय पदाधिकारी बेबस और लाचार दिखाई पड़ रहे हैं. इधर झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से बार-बार कभी जिला शिक्षा पदाधिकारी, तो कभी क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा उपनिदेशक(आरजेडीई) को पत्राचार किया जा रहा. उस पर भी लेखापालों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ की ओर से उत्तरी छोटानागपुर के कमिश्नर चंद्रेश उरांव को पत्र लिखा गया. शिक्षक संघ के पत्र पर संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने आरजेडीई को पूरे मामले की जांच कर लेखापालों पर कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है. जानकारी के मुताबिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव ने इचाक बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स कलस्टर) में कार्यरत लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर संजय राणा को वहां से हटाने की गुहार डीईओ से लगाई गई थी. दरअसल विभागीय जांच के दौरान कार्यों में उस लेखापाल की लापरवाही और विभागीय आदेश के उल्लंघन का आरोप प्रमाणित हुआ था. दरअसल वह मूल रूप से बरही बीआरसी में कार्यरत है और पदमा व इचाक बीआरसी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. पदमा और इचाक में उसके कार्यों में शिथिलता पायी गई. इस मामले में आरजेडीई ने डीईओ को कार्रवाई का आदेश देते हुए उस लेखापाल को इचाक से हटाने की बात कही थी. साथ ही शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निदेशक के आदेश के आलोक में वहां कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चुरचू के लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर प्रेमचंद राम को प्रभार देने का आदेश दिया. लेकिन न तो इचाक के लेखापाल संजय राणा ने अपना प्रभार छोड़ा और न प्रेमचंद राम को प्रभार मिल पाया. एक बार फिर मनमाफिक तरीके से लेखापाल संजय राणा इचाक बीआरसी में बने रहें.

बड़ी वित्तीय अनियमितताओं को दिया जा रहा अंजाम

इधर सत्र 2022-23 के समापन की अवधि नजदीक देख शिक्षकों का लाखों का बिल फंसने की आशंका है. उन्हें राशि लैप्स करने का भय सता रहा है. लेकिन इसकी परवाह लेखापालों को कतई नहीं है. वहां से लेखापाल को हटाए जाने के बाद भी कई वाउचर और बिल उसी लेखापाल और बीइइओ के हस्ताक्षर से पास भी हो रहे हैं. ऐसे में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का मामला भी सामने आने की बात कही जा रही है. इधर डीईओ इचाक के लेखापाल संजय राणा को हटाने का आदेश तो निकाल रहे हैं, लेकिन वह वहां का प्रभार ही नहीं छोड़ रहे और बदस्तूर अपना काम जारी रखे हुए हैं. बीइइओ भी वहां मौन साधे बैठे हैं. ऐसे में संघ ने कमिश्नर को पत्र लिखा, तो आरजेडीई को फिर लेखापाल पर कार्रवाई का आदेश दिया गया है.

जिलेभर में लेखापालों का चल रहा अलग ही गोरखधंधा

दरअसल यह सारा खेल गोरखधंधे से जुड़ा बताया जा रहा है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में पर्दे के पीछे से लेखापालों ने अपना समन्वय बना रखा है. अगर किसी का प्रभार छिनता है, तो दूसरा प्रभार नहीं लेता है और तरह-तरह का बहाना बनाकर डीईओ कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर देता है. अब इचाक बीआरसी में जिस कटकमसांडी के लेखापाल मनोज कुमार सिंह को प्रभार लेने का आदेश दिया गया है, उन्होंने डीईओ कार्यालय में आवेदन देकर अपनी कई तरह की बीमारियों की बात कही है. साथ ही इचाक लेखापाल का प्रभार लेने से मना कर दिया है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा कि इतनी बीमारियां है, तो वह दो-दो बीआरसी का अतिरिक्त प्रभार कैसे संभाल रहे हैं. बहरहाल मामला जो भी हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण से इस बात की पुष्टि हो रही है कि बीआरसी के लेखापाल जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश को ताक पर रखे हुए हैं. वहीं शिक्षा पदाधिकारी को अपने वरीय आरजेडीई के आदेश की परवाह नहीं है. ऐसे में पूरे प्रकरण में शिक्षक परेशान हैं और लेखापालों के विवाद का शिकार हो रहे हैं.

डीईओ के आदेश पर सबकुछ हो रहा : बीइइओ

इचाक के बीइइओ बंशीधर राम कहते हैं कि लेखापाल के मामले में वह क्या कह सकते हैं. बिल और वाउचर पर हस्ताक्षर करना उनकी मजूबरी है. वह कहते हैं कि हटाए जाने के बाद झारखंड शिक्षा परियोजना में भी सभी कर्मी यथावत बने हुए हैं, वैसे ही यहां लेखापाल बने हुए हैं. इस मामले में डीईओ से बात करें, तो बेहतर होगा. उन्हीं के आदेश पर सबकुछ हो रहा है.

कोई प्रभार नहीं ले रहा, तो मैं क्या करूं : डीईओ

डीईओ उपेंद्र नारायण ने कहा कि कोई प्रभार नहीं ले रहा है, तो इस मामले में वह क्या कर सकते हैं. आरजेडीई के पत्र के आलोक में उन्होंने तो लेखापाल संजय राणा को इचाक बीआरसी से हटाने का आदेश पत्र निकाल दिया था. एक बार फिर वह पत्र निकाल रहे हैं. इसे भी पढ़ें : CBI">https://lagatar.in/cbi-asks-for-manish-sisodias-five-day-remand-argues-questions-not-answered-during-interrogation/">CBI

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