alt="सिविल वार में वापसी की वास्तूकल" width="600" height="400" /> कर्नाटक पुलिस के डीजीपी अमर कुमार पांडेय की लिखित पुस्तक बाजार [/caption] पुस्तक ने इसे समझाने के लिए इसे सुधारने के द्वारा उद्यम वास्तुकला ढांचे को शामिल किया है. पुस्तक में वापसी प्रक्रिया की अंतर्निहित जटिलताओं, ढांचा पहचानने के महत्व पर जोर दिया गया है. जटिल चरों की परस्पर क्रिया और रिटर्न मैट्रिक्स पर इसका प्रभाव भी पुसितक में बताया गया है. पुस्तक एक विवरण सीडी बनाने वाले रिटजियों की वापसी का एक आसान-से-समझने वाला कामकाजी मॉडल प्रदान करती है. विभिन्न स्थितियों में इसकी संचालन क्षमता के लिए ढांचे का और पता लगाया जा सकता है शरणार्थी-वापसी के मुद्दों से निपटने वाले कई अन्य देशों में, डॉ. अमर कुमार पांडे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, कर्नाटक राज्य, भारत, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सदस्य हैं. वह नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू से पीएचडी की है.
alt="" width="600" height="400" /> शरणार्थी अध्ययन, बोस्निया और हर्जेगोविना में, डॉ. पांडे ने मानवाधिकार अधिकारी के रूप में कार्य किया है. बंजा लुका में और डोबोज क्षेत्र में मानवाधिकार समन्वयक के रूप में संयुक्त राष्ट्र मिशन में शांतिदूत के रूप में सिएरा लियोन में उन्होंने सेवा की है. मकेनी में पुलिस मॉनिटर के रूप में और राष्ट्रीय पुलिस के पुलिस सलाहकार के रूप में संयुक्त राष्ट्र मिशन में फ्रीटाउन भी रहे हैं. डॉ. पांडे को भारत सरकार द्वारा वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है.इसके अलावा विशिष्ट सेवा के लिए भारत का राष्ट्रपति पदक और सराहनीय सेवा में उन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति सेवा के लिए सेवा के पदक से सम्मानित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा बोस्निया हर्जेगोविना और सिएरा लियोन के संघर्ष क्षेत्रों में उन्हें सम्मानित किया गया है. उद्यम वास्तुकला के क्षेत्र में प्रतिष्ठित जचमैन पुरस्कार से भी नवाजे गये हैं. डॉ. पांडे बेंगलुरू में रहते हैं. [wpse_comments_template]

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