अस्पताल में मॉड्यूलर ओटी चालू, पित्त की थैली में स्टोन को लेजर सर्जरी से निकाला
दो-दो बार जहर खाकर किया आत्महत्या का प्रयास
केस-1 : इचाक प्रखंड में सालभर पहले 15 वर्ष की उम्र में एक दिव्यांग लड़की की शादी बरही के 35 वर्षीय ट्रक चालक के साथ कर दी गई. लड़की से पूछा तक नहीं गया और बाली उम्र में ही वह गर्भवती हो गई. मानसिक प्रताड़ना में दो-दो बार उसने जहर खाकर आत्महत्या तक करने का प्रयास किया. उसे हजारीबाग के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए लाया गया था. फिर दो बार ससुराल से भाग भी गई. बाद में उसके मायकेवालों ने लड़की को उसके नानी घर भेज दिया.मैट्रिक की परीक्षा से कर दिया गया वंचित, कर दी गई शादी
केस-2 : इसी वर्ष करीब दो माह पहले इचाक में एक नाबालिग लड़की का विवाह उसके अभिभावकों ने जबरन कर दी. वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी और मैट्रिक का इम्तिहान देना था. विवाह के फेर में उसके अभिभावकों ने उसे परीक्षा में भी नहीं बैठने दिया. उसकी पढ़ाई और करियर के सारे अरमानों और सपनों पर तुषारापात हो गया.3 मई को नाबालिगों की शादी, एक शादी 10 मई को तय
केस-3 : इचाक प्रखंड में तीन मई को दो नाबालिग बेटियों की शादी कर दी गई. इस पर कोई संज्ञान लेनेवाला नहीं है. वहीं एक बेटी की शादी 10 मई को तय है. वह भी नाबालिग है. यह बच्ची नौवीं कक्षा की छात्रा है. गांव के एक स्कूल में उसका नामांकन भी है. इसे भी पढ़ें :लातेहार:">https://lagatar.in/latehar-aryan-gupta-a-student-of-netarhat-school-brought-laurels-to-jharkhand/">लातेहार:नेतरहाट विद्यालय के छात्र आर्यन गुप्ता ने किया झारखंड का नाम रौशन
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नियति ने किया क्रूर मजाक और अब अभिभावक : रीता कुमारी
सामाजिक संस्था जनसहयोग केंद्र की संचालिका रीता कुमारी कहती हैं कि यह समाज की गंभीर समस्या है. अगर 21वीं सदी में भी यह हाल है, तो बड़ा चिंतनीय सवाल है. इचाक की बेटी के साथ तो नियति ने क्रूर मजाक तो किया ही और उसके अभिभावक उससे भी भद्दा मजाक व संगीन जुर्म कर रहे हैं. अभिभावकों को संकुचित मानसिकता से ऊपर उठकर बेटियों को बेटे के समान समझना चाहिए. बेटियों को पूरा हक है कि उसे समान अधिकार मिले. उसकी मर्जी के बिना उसकी शादी नहीं हो. बेटियों को भी खुद पर होनेवाले जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है.alt="" width="600" height="400" />
वक्त पर ही शादी होनी चाहिए, यह गैरकानूनी कदम : रिंकी विश्वकर्मा
बरही की समाजसेवी रिंकी उर्फ सुषमा विश्वकर्मा कहती हैं कि बेटियों की वक्त पर ही शादी होनी चाहिए. समाज को भी नाबालिग बेटियों की शादी रोकने के लिए आगे आना चाहिए. अभिभावकों को बेटियों और उसके अधिकार के प्रति जागरूक होने की जरूरत है. नाबालिग बेटी की शादी करना गैरकानूनी है. उसके मां-बाप ही ऐसे करेंगे, तो बेटियों की सेहत का ख्याल कौन करेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है.alt="" width="600" height="400" />

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