Search

क्या बेटियां अब भी बोझ : नाबालिग लड़की की शादी कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अभिभावक

Amarnath Pathak / Pramod Upadhyay Hazaribagh : बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाएं लाख सहयोग करें लेकिन उनकी दशा तभी सुधर सकती है, जब तक कि अभिभावक अपनी मानसिकता को नहीं बदलें. हजारीबाग में आज भी ऐसे कई परिवार हैं, जो बेटियों को बोझ समझ रहे हैं. जल्द उसके हाथ पीले कर विदा कर देने में ही अपनी भलाई समझते हैं. ऐसा कर अभिभावक अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ ले रहे हैं. ऐसे अभिभावकों का कहना है कि यही उनकी जिम्मेदारी है, जिसे बेटी को विदा करने के साथ ही पूरी कर ली. इचाक के दो ऐसे मामले सामने आए हैं जिससे सरकार और सामाजिक संस्थाओं की ओर से चलाए जाने वाले जागरुकता अभियान पर भी सवाल खड़ा कर दिया है. इतनी पहल के बाद भी लोगों के जेहन से बेटे-बेटियों में भेदभाव की बात क्यों नहीं निकल पा रही है. बेटियों को बोझ समझने की भूल क्यों कर रहे हैं या फिर उसे अभिशाप के रूप में क्यों देख रहे हैं. यह गंभीर चिंतन और आत्ममंथन का विषय है. इचाक में दो नाबालिग लड़कियों की शादी कर दी गई. वह भी उम्र में काफी अंतर रखनेवाले युवक के साथ. इसे भी पढ़ें :सदर">https://lagatar.in/modular-ot-started-in-sadar-hospital-stone-in-gallbladder-removed-by-laser-surgery/">सदर

अस्पताल में मॉड्यूलर ओटी चालू, पित्त की थैली में स्टोन को लेजर सर्जरी से निकाला

दो-दो बार जहर खाकर किया आत्महत्या का प्रयास

केस-1 : इचाक प्रखंड में सालभर पहले 15 वर्ष की उम्र में एक दिव्यांग लड़की की शादी बरही के 35 वर्षीय ट्रक चालक के साथ कर दी गई. लड़की से पूछा तक नहीं गया और बाली उम्र में ही वह गर्भवती हो गई. मानसिक प्रताड़ना में दो-दो बार उसने जहर खाकर आत्महत्या तक करने का प्रयास किया. उसे हजारीबाग के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए लाया गया था. फिर दो बार ससुराल से भाग भी गई. बाद में उसके मायकेवालों ने लड़की को उसके नानी घर भेज दिया.

मैट्रिक की परीक्षा से कर दिया गया वंचित, कर दी गई शादी

केस-2 : इसी वर्ष करीब दो माह पहले इचाक में एक नाबालिग लड़की का विवाह उसके अभिभावकों ने जबरन कर दी. वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी और मैट्रिक का इम्तिहान देना था. विवाह के फेर में उसके अभिभावकों ने उसे परीक्षा में भी नहीं बैठने दिया. उसकी पढ़ाई और करियर के सारे अरमानों और सपनों पर तुषारापात हो गया.

3 मई को नाबालिगों की शादी, एक शादी 10 मई को तय

केस-3 : इचाक प्रखंड में तीन मई को दो नाबालिग बेटियों की शादी कर दी गई. इस पर कोई संज्ञान लेनेवाला नहीं है. वहीं एक बेटी की शादी 10 मई को तय है. वह भी नाबालिग है. यह बच्ची नौवीं कक्षा की छात्रा है. गांव के एक स्कूल में उसका नामांकन भी है. इसे भी पढ़ें :लातेहार:">https://lagatar.in/latehar-aryan-gupta-a-student-of-netarhat-school-brought-laurels-to-jharkhand/">लातेहार:

नेतरहाट विद्यालय के छात्र आर्यन गुप्ता ने किया झारखंड का नाम रौशन
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/sss-3.jpg"

alt="" width="600" height="400" />

नियति ने किया क्रूर मजाक और अब अभिभावक : रीता कुमारी

सामाजिक संस्था जनसहयोग केंद्र की संचालिका रीता कुमारी कहती हैं कि यह समाज की गंभीर समस्या है. अगर 21वीं सदी में भी यह हाल है, तो बड़ा चिंतनीय सवाल है. इचाक की बेटी के साथ तो नियति ने क्रूर मजाक तो किया ही और उसके अभिभावक उससे भी भद्दा मजाक व संगीन जुर्म कर रहे हैं. अभिभावकों को संकुचित मानसिकता से ऊपर उठकर बेटियों को बेटे के समान समझना चाहिए. बेटियों को पूरा हक है कि उसे समान अधिकार मिले. उसकी मर्जी के बिना उसकी शादी नहीं हो. बेटियों को भी खुद पर होनेवाले जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/sssss-4.jpg"

alt="" width="600" height="400" />

वक्त पर ही शादी होनी चाहिए, यह गैरकानूनी कदम : रिंकी विश्वकर्मा

बरही की समाजसेवी रिंकी उर्फ सुषमा विश्वकर्मा कहती हैं कि बेटियों की वक्त पर ही शादी होनी चाहिए. समाज को भी नाबालिग बेटियों की शादी रोकने के लिए आगे आना चाहिए. अभिभावकों को बेटियों और उसके अधिकार के प्रति जागरूक होने की जरूरत है. नाबालिग बेटी की शादी करना गैरकानूनी है. उसके मां-बाप ही ऐसे करेंगे, तो बेटियों की सेहत का ख्याल कौन करेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/ssss-2.jpg"

alt="" width="600" height="400" />

कोडरमा जैसा बाल मित्र ग्राम बनाइए : गोविंद खनाल 

बचपन बचाओ आंदोलन के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सह कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के वरिष्ठ कार्यकर्ता गोविंद खनाल कहते हैं कि कोडरमा जैसा बाल मित्र ग्राम बनाइए. यहां बच्चों के हाथों में ही सबकुछ है. बाल पंचायत में यहां की बेटी राधा पांडेय ने अपने अभिभावकों का विरोध कर न सिर्फ अपनी शादी रूकवाई, बल्कि दर्जनों बाल विवाह पर विराम लगा दिया. आज वह कोडरमा की ब्रांड एंबेसेडर है. नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की संस्था बच्चों के हित के लिए हर कदम उठाती रही है. हजारीबाग के इचाक में अगर ऐसा हुआ है, तो उन बेटियों को न्याय दिलाने की जरूरत है. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp