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अर्का जैन यूनिवर्सिटी : ऑटोमोटिव व सैन्य वाहनों के नवाचार और उत्पादन विकास चक्र पर हुई विशेष व विस्तृत चर्चा

Jamshedpur (Anand Mishra) : अर्का जैन यूनिवर्सिटी शिक्षा में उत्कृष्टता प्रदान कर रहा है और छात्रों को नवाचार और अनुसंधान के लिए भी प्रेरित करता है. इस क्रम में यूनिवर्सिटी के अनुसंधान और विकास सेल (उत्पाद विकास, निगरानी और व्यावसायीकरण समिति) की ओर से शनिवार को "ऑटोमोटिव/रक्षा वाहनों के नवाचार और उत्पादन विकास चक्र" विषयक पर ऑनलाइन मोड में विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया. सत्र में विभिन्न संकाय सदस्यों, छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं समेत 70 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए. सत्र के दौरान रिसोर्स पर्सन के रूप में पुणे स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के इंजीनियरिंग प्रमुख अश्वनी गर्ग ऑनलाइन शामिल हुए. उन्होंने विषय वस्तु पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किये. इसे भी पढ़ें : झारखंड">https://lagatar.in/everyone-will-have-their-own-permanent-house-in-jharkhand-by-2027-cm/">झारखंड

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इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के निदेशक सह कुलसचिव डॉ अमित कुमार श्रीवास्तव समेत प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ एसएस रजी, संयुक्त रजिस्ट्रार डॉ जसबीर सिंह धंजल, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अंगद तिवारी, डॉअरविंद कुमार पांडेय, आईक्यूएसी निदेशक डॉ अश्विनी कुमार, सहायक डीन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड आईटी समेत सभी डीन और विभागाध्यक्ष उपस्थित थे. आरडीसी निदेशक डॉ सोनिया रियात के मार्गदर्शन में सत्र का संचालन डॉ कीर्ति राय व डॉ चंद्रप्रभा साहू ने किया. इसे भी पढ़ें : भाजपा">https://lagatar.in/bjp-got-approximately-rs-1300-crore-from-electoral-bonds-in-2022-23-and-congress-get-only-rs-171-crore/">भाजपा

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इससे पूर्व सत्र के आरम्भ में प्रो आलोक कुमार महाराणा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया. इसके बाद अतिथि वक्ता सह रिसोर्स पर्सन अश्वनी गर्ग ने सैन्य और ऑटोमोटिव वाहनों के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों एवं चरणों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. इंजीनियरिंग नवाचारों के लिए केस स्टडी, इंजीनियरिंग उत्पाद विकास चक्र, नवाचार, पेटेंट व बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और रक्षा वाहन उत्पादों की विशेषताओं सम्बन्ध में भी विस्तार से चर्चा की. उन्होंने इसके बारे में बहुत ही सूक्ष्म विवरण देकर समझाया और अनुसंधान के प्रति समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित किया. सत्र के समापन पर प्रो सुमंत सेन ने धन्यवाद ज्ञापन किया. [wpse_comments_template]

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