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मणिपुर : आदिवासी एकता मार्च में हिंसा भड़की, आठ जिलों में कर्फ्यू, इंटरनेट बंद, आर्मी ने किया फ्लैग मार्च

Imphal : मणिपुर में हिंसा भड़क जाने के बाद आज गुरुवार को सेना द्वारा राज्य के हिंसा प्रभावित इलाकों में मार्च किये जाने की सूचना है. खबरों के अनुसार कल रात इंफाल, चुराचांदपुर और कांगपोकपी में आदिवासियों के मार्च के दौरान हिंसा भड़क गयी. हिंसा पर काबू पाने के लिए राज्य के 8 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. गैर-आदिवासी बहुल इंफाल पश्चिम, काकचिंग, थौबल, जिरिबाम और बिष्णुपुर जिलों और आदिवासी बहुल चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनौपाल जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है. राज्य में 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गयी है.

 मेइतेई समुदाय को  ST का दर्जा दिये जाने की बात कही गयी  

हिंसा भड़कने का कारण कोर्ट का वह आदेश बताया जाता है, जिसमें गैर आदिवासी मेइतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिये जाने की बात कही गयी है. खबर है कि मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा पिछले माह राज्य सरकार को मेइतेई  समुदाय द्वारा एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का आदेश दिया गया था. यह बात आदिवासी समूहों को रास नहीं आयी. इसके विरोध में बुधवार को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने चुराचंदपुर जिले के तोरबंग इलाके में आदिवासी एकता मार्च का आयोजन किया था.

आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा भड़की

पुलिस के अनुसार इस मार्च में हजारों लोग शामिल हुए, इसी दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा भड़क गयी. प्रशासन ने हिंसा रोकने के लिए सेना और असम राइफल्स की तैनाती कर दी. सेना और असम राइफल्स ने फ्लैग मार्च किया. खबर है कि हिंसा भड़कने के बाद राज्य के विभिन्न इलाकों में लगभग 7,500 लोगों को आर्मी के कैंप और सरकारी कार्यालयों में शरण दी गयी है.

 दुकानों और घरों में तोड़फोड़ के साथ आगजनी की गयी.

पुलिस के अनुसार, चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में मार्च के दौरान हथियार लिए हुए लोगों की एक भीड़ ने कथित तौर पर मेइतेई समुदाय के लोगों पर हमला किया, जिसकी जवाबी कार्रवाई में मेइतेई समुदाय के लोगों ने भी हमले किये, जिसके कारण पूरे राज्य में हिंसा भड़क गयी. उन्होंने बताया कि तोरबंग में तीन घंटे से अधिक समय तक हुई हिंसा में कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ के साथ ही आगजनी की गयी. लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा, संपत्ति के नुकसान के अलावा कीमती जानें चली गयी हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.   सिंह ने कहा कि हिंसा समाज में गलतफहमी का नतीजा है.  उन्होंने कहा, राज्य सरकार कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए सभी कदम उठा रही है

मेइतेई समुदाय गैर-आदिवासी समुदाय माना जाता है

मेइतेई समुदाय गैर-आदिवासी समुदाय माना जाता है. यह मणिपुर की आबादी का 53% हिस्सा है. इस समुदाय के अधिकतर लोग मणिपुर घाटी में रहते हैं मौजूदा कानून के अनुसार, मेइतेई लोगों को राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है. मणिपुर के चुराचांदपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने सभा स्थल पर जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी. मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह चुराचांदपुर जिले के न्यू लमका इलाके में एक जिम और खेल सुविधा केंद्र का उद्घाटन करने वाले थे. धारा 144 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आये. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े. [wpse_comments_template]

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