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दस्तावेज में पश्चिम बंगाल का जिक्र है
दरअसल दस्तावेजों में राज्य का उल्लेख पश्चिम बंगाल के नाम से है. जबकि 1932 में यह सिर्फ बंगाल था. क्योंकि पश्चिम बंगाल 1947 में अस्तित्व में आया. इसी तरह, दस्तावेज में कई जगहों पर गवाहों, विक्रेता और क्रेता के पते के साथ पिन कोड का उल्लेख किया गया है. जबकि पोस्टल इंडेक्स नंबर (पिन) 15 अगस्त, 1972 को पेश किया गया था. वहीं जमीन के दस्तावेज में बिक्री के एक साक्षी का मूल जिला भोजपुर बताया गया है. जबकि भोजपुर जिला 1972 में अस्तित्व में आया है.अलग से लगायी गयी थी दस्तावेज में प्रति
ऐसी जानकारी है कि कथित रूप से `फर्जी` दस्तावेज की प्रति कोलकाता रजिस्ट्री कार्यालय के भूमि अभिलेखों में अलग से लगायी गई थी. अब ईडी ऐसे सभी दस्तावेजों के साथ-साथ कोलकाता रजिस्ट्रार कार्यालय के भूमि रजिस्टरों का फॉरेंसिक जांच कर सकती है. ताकि पन्ने और स्याही कब के हैं, इसका पता लगाया जा सके. ईडी ने इस मामले को जांच के लिए लिया और तत्कालीन रांची डीसी और आईएएस छवि रंजन, भूमि दलालों और कई राजस्व अधिकारियों के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी की. यहां तक कि दक्षिण छोटानागपुर के संभागीय आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी द्वारा दिए गए जांच के आदेश में कहा गया है कि रांची में 4.55 एकड़ भूमि वर्तमान में भारतीय सेना के कब्जे में है. लेकिन जयंत कर्नाड के स्वामित्व में, प्रदीप बागची द्वारा धोखे से एक दिलीप घोष नाम के व्यक्ति को जमीन बेच दी गयी थी. अखिल भारतीय अनुसुचित जाति महासभा के राष्ट्रीय महासचिव उपेंद्र कुमार द्वारा नवंबर 2021 में दर्ज कराई गई एक शिकायत के मद्देनजर जांच का आदेश दिया गया था. कोलकाता के दिलीप घोष जगतबंधु टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं. उप निदेशक (कल्याण) द्वारा की गई जांच में कहा गया है कि विक्रेता प्रदीप बागची के पक्ष में उक्त भूमि के स्वामित्व का एक फर्जी दस्तावेज (पंजीकरण संख्या 4369/19932) बनाया गया था. 1 अक्टूबर, 2021 को जांच रिपोर्ट में कहा गया है, "प्रथम दृष्टया यह आरोप सही पाया गया है कि जमीन की बिक्री को फर्जी तरीके से अंजाम दिया गया था." यह भारतीय सेना के कब्जे वाले शहर के मध्य में स्थित एक प्रमुख भूमि है. बड़े आश्चर्य की बात है कि उक्त खरीद के बाद बागची ने कभी भी भारतीय सेना द्वारा उनकी जमीन पर कब्जे के खिलाफ या किराए की मांग के लिए किसी अदालत का रुख नहीं किया. 90 साल बाद अचानक प्रदीप बागची आए और जगतबंधु टी एस्टेट के डायरेक्टर दिलीप कुमार घोष को जमीन बेच दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संदेह पैदा करता है.भूमि का संक्षिप्त इतिहास
रिकॉर्ड के मुताबिक, उक्त भूमि मौजा मोरहाबादी, थाना संख्या 192 और वार्ड 21 के अंतर्गत स्थित है. जो एमएस प्लॉट संख्या 557 के रूप में दर्ज है. इसे भी पढ़ें - पश्चिम">https://lagatar.in/shah-said-in-west-bengal-win-35-seats-in-the-lok-sabha-no-one-will-dare-to-attack-ram-navami-procession/">पश्चिमबंगाल में बोले शाह, लोकसभा में 35 सीटें जिताइए, रामनवमी जुलूस पर हमला करने की हिम्मत कोई नहीं जुटायेगा [wpse_comments_template]

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