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आरोग्यम स्कैम : एक व्यक्ति, एक बिल्डिंग, आवंटन अलग-अलग

सारे फ्लोर एक ही व्यक्ति को अलग-अलग आवंटित किए गए न बोर्ड में पास हुआ प्रस्ताव, न नियमों का किया गया पालन Ranchi : हजारीबाग के आरोग्यम सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल स्कैम में रोज नए खुलासे हो रहे हैं. नये बहुद्देश्यीय भवन में जहां कई छोटी-छोटी दुकानें खुलनी थीं. कई लोगों को रोजगार देने की शर्त भी थी, उस पूरे फ्लोर ही नहीं पूरी बिल्डिंग को एक ही व्यक्ति को दे दिया गया. हर फ्लोर एक ही व्यक्ति इस्तेमाल कर रहा है पर आवंटन अलग-अलग है. मामले में जिला प्रशासन की ओर से सरकार को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें किराये से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है. पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 10 जनवरी 2014 को पहली बार पुराने एलआईसी भवन के लिए 12 रुपये प्रति वर्गफीट किराया कोट गया था, जिसे रद्द कर दिया गया. फिर 10 जुलाई को 8 रुपये वर्गफीट किया गया, उसे भी रद्द कर दिया गया. तीसरी बार 14 अक्तूबर 2014 का रेट 12 रुपये प्रति वर्गफीट किराये का कोट आया, जिस पर आरोग्यम को भवन आवंटित कर दिया गया. वहीं, पुराना भवन 14 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से दिया गया, जिसका एरिया 15,810 रुपये प्रति वर्गफीट है. इसमें आठ रुपये प्रति वर्गफीट किराये का कोट हुआ था. फिर किराया समिति की बैठक 30 जुलाई 2014 को हुई. 14 अक्तूबर 2014 को 12 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से पहला भवन मिला था. दूसरे व नए आवंटित बहुद्देश्यीय भवन में ग्राउंड फ्लोर 3000 रुपये वर्गफीट और तीसरे फ्लोर का 2700 रुपये वर्गफीट किराया रखा गया था. भूतल का मूल्य 3003 रुपये प्रतिवर्ग फीट की दर से 17 दिसंबर 2018 को आवंटित कर दिया गया. वहीं, तीसरे व पुराने भवन को 15 रुपये प्रति वर्गफीट पर दिया गया. इसके एरिया का ही जिक्र नहीं किया गया है.

किराये पर उठ रहे सवाल

जिला परिषद हजारीबाग की ओर से आरोग्यम अस्पताल को हस्तांतरित किए गए भवनों में पहला भवन तत्कालीन जिप अध्यक्ष ब्रजकिशोर जायसवाल के कार्यकाल में आरोग्यम को दिया गया. इस दौरान कहीं न कहीं बोर्ड और समिति सम्मिलत हुई. लेकिन दूसरे और तीसरे भवन के आवंटन में जिला परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष सुशीला देवी को बायपास किया गया. इसलिए उन्होंने इस पर आपत्ति भी जताई थी. इसके अलावा एक अन्य भवन को हस्तांतरण के लिए न तो बोर्ड में प्रस्ताव लाया गया और न नियमों का अनुपालन किया गया. सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि कोविड काल में भवनों के हस्तांतरण की क्या आवश्यकता पड़ गई. अन्य दो भवनों पैराडाइज रिसोर्ट और जिला परिषद पार्क को भी निजी हाथों में सौंपने की नौबत क्यों आई? राज्यपाल से की गई शिकायत में जिला परिषद के इन भवनों को पब्लिक प्रॉपर्टी बताया गया है. आखिर आपस में संबंधित व्यक्तियों को ही जिला परिषद की इन सभी पब्लिक प्रॉपर्टी को क्यों सौंपा गया? वह भी एक ही अधिकारी जिला परिषद की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक सह उप विकास आयुक्त जाधव विजया नारायण राव के कार्यकाल में इन भवनों का हस्तांतरण किया गया.

बिफरे जिला परिषद अध्यक्ष

कोविड काल में पब्लिक प्रॉपर्टी को निजी हाथों में सौंपे जाने के मामले में जिला परिषद अध्यक्ष उमेश मेहता बिफर पड़े. उन्होंने कहा कि जिला परिषद के एक अधिकारी ने किन कारणों से बोर्ड को नजरअंदाज कर रेवड़ियों की तरह आमजन की संपत्ति को निजी हाथों में सौंप दिया. निश्चित रूप से इसकी छानबीन की जाएगी. यह मामला न सिर्फ गंभीर, बल्कि चिंतनीय भी है. [wpse_comments_template]

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