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असम चुनाव: 9 अप्रैल से 4 मई तक इंतजार क्यों, इरफान अंसारी ने EC से मांगा जवाब

झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को प्रस्तावित मतगणना के बीच लंबे अंतराल पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा कि 26 दिनों का यह अंतराल समझ से परे है और इसे लेकर आम जनता के साथ उनके मन में भी कई सवाल उठ रहे हैं.
 

Ranchi : झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को प्रस्तावित मतगणना के बीच लंबे अंतराल पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा कि 26 दिनों का यह अंतराल समझ से परे है और इसे लेकर आम जनता के साथ उनके मन में भी कई सवाल उठ रहे हैं.

 

उन्होंने कहा कि इतनी लंबी देरी चिंता और आशंकाओं को जन्म देती है. कहीं ऐसा न हो कि जनता के जनमत के साथ अन्याय हो या उसके विश्वास को ठेस पहुंचे. उन्होंने आशंका जताई कि क्या यह किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं है और क्या इतनी लंबी अवधि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की संभावनाओं को बल नहीं देती.

 

इरफान अंसारी ने सवाल उठाया कि क्या यह पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक मानकों के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि ये सभी गंभीर सवाल हैं और इनका स्पष्ट, पारदर्शी और संतोषजनक जवाब मिलना जरूरी है.

 

उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि मतदान के तुरंत बाद अधिकतम 5 से 6 दिनों के भीतर मतगणना की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता का भरोसा मजबूत हो.

 

उन्होंने कहा कि 26 दिनों के लंबे अंतराल के बाद ईवीएम से मतगणना को लेकर स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और क्या मशीनों की बैटरी व तकनीकी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

 

उन्होंने कहा कि इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद मन में शंका उत्पन्न होना लाजिमी है. लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और इसे हर हाल में मजबूत बनाए रखना जरूरी है.

 

इरफान अंसारी ने कहा कि असम की जनता बदलाव चाहती है और उन्हें विश्वास है कि महागठबंधन की जीत निश्चित है. हालांकि उन्होंने कहा कि इतनी लंबी देरी कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब मिलना आवश्यक है.

 

उन्होंने असम के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और महागठबंधन के सभी साथियों से अपील की कि वे सतर्क रहें, ईवीएम की निगरानी करें और मतगणना तक पूरी जिम्मेदारी और सजगता के साथ डटे रहें. उन्होंने कहा कि यह उनकी आशंका और चिंता है, जिसे उसी भावना से समझा जाना चाहिए. लोकतंत्र की मजबूती और पारदर्शिता हम सभी की साझा जिम्मेदारी है.

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