Lagatar Desk: 21 मई 1991. जिस दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई. वह एक चुनावी सभा को संबोधित करने तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बुदुर गए थे. वहां लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल एलम/तमिल टाइगर (LTTE) नामक उग्रवादी संगठन के आत्मघाती हमले के शिकार बन गए.
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या को सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों की नाकामयाबी के तौर पर देखना जायज नहीं होगा. हत्या कैसे हुई? किस तरह साजिश रची गई? साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे? 35 सालों बाद भी देश को इन सवालों का जवाब नहीं मिला है.
सात नवंबर 2026 को द गार्जियन अखबार ने सोनिया गांधी का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया है. इस इंटरव्यू में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को राजीव गांधी की हत्या का जिम्मेदार ठहराया है. इसके बाद से सोनिया गांधी का इंटरव्यू चर्चा में हैं.
सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली पुस्तक Belonging को लेकर जो इंटव्यू दिया है, उसमें कहा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें लगातार डर रहता था कि “राजीव अगला निशाना बनेंगे”. राजीव गांधी की हत्या से पहले भारतीय खुफिया एजेंसियों ने LTTE की धमकी की जानकारी दी थी. LTTE ने ये धमकियां श्रीलंका गृहयुद्ध में भारत के हस्तक्षेप के कारण दी थी.
सोनिया गांधी के मुताबिक 1989 के बाद देश में बनी वीपी सिंह की नेशनल फ़्रंट की सरकार LTTE की धमकियों व सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनियों को नजरअंदाज किया. उनकी उच्च स्तरीय सुरक्षा (SPG कवर) हटा दी.
इंटरव्यू के मुताबिक सोनिया का मानना है कि हत्या के पीछे व्यापक साजिश की पूरी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है. उन्होंने कहा कि अब शायद पूरी सच्चाई कभी पता ही न चले. सबसे हालिया जांच आयोग को मोदी सरकार ने बंद कर दिया है.
तथ्य
- 1989 में राजीव गांधी चुनाव में हार गए थे. इसके बाद वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने. SPG (Special Protection Group) मूल रूप से सिर्फ मौजूदा प्रधानमंत्री के लिए था. वीपी सिंह सरकार ने राजीव की SPG सुरक्षा वापस ले ली और वैकल्पिक व्यवस्था दी.
- 1992 में जस्टिस जेएस वर्मा कमीशन ने रिपोर्ट दी कि SPG कवर हटाने और पर्याप्त वैकल्पिक सुरक्षा न देने से राजीव की सुरक्षा का स्तर घट गया, जबकि खतरा बना रहा.
- कांग्रेस और गांधी परिवार के लोग लंबे समय तक वीपी सिंह सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. 1990 के दशक की इंडिया टुडे (India Today) की रिपोर्ट में भी सोनिया के लोगों द्वारा वीपी सिंह को दोषी मानने का जिक्र है.
- वीपी सिंह के पक्ष का तर्क था कि SPG सुरक्षा कानून के तहत खुद ही खत्म हो गई थी, वैकल्पिक सुरक्षा दी गई थी, कोई दुर्भावना नहीं थी, और हत्या के समय (मई 1991) अलग सरकार (चंद्रशेखर की) थी.