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विस चुनाव : 1985 के बाद रांची सीट से नहीं जीती कांग्रेस, फिर भी पार्टी कर रही दावे पर दावे

  • - हटिया में 2009 और सिल्ली में 1995 में अंतिम बार जीती कांग्रेस
  • - 2014 में कांग्रेस रांची से लड़ी अकेले, मगर महज 7935 मत प्राप्त कर सुरेंद्र सिंह करा चुके जमानत जब्त
Kaushal Anand Ranchi :  कभी पूरे बिहार और देश में एकछत्र राज करने वाली पार्टी कांग्रेस झारखंड में कितने बुरे दौर से गुजर रही है, उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रांची जैसी महत्वपूर्ण सीट पर वह 1985 के बाद कभी जीती ही नहीं. फिर भी हर बार कांग्रेस रांची सीट से दावा करती है. रांची सीट पर कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2014 में कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ी. रांची से निवर्तमान रांची महानगर अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चुनाव लड़े, जो महज 7935 मत प्राप्त कर सके, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी झामुमो की महुआ माजी 36897 हजार मत लाकर दूसरे स्थान पर रहीं. 1985 में अंतिम बार कांग्रेस के विधायक रांची से जयप्रकाश गुप्ता (अब दिवंगत) रहे . 1972 : देवदत्त साहू 1977 : नन्नी गोपाल मित्रा 1980 :  ज्ञान रंजन 1985 : जय प्रकाश गुप्ता 1990 : गुलशन लाल आजमानी 2000 : यशवंत सिन्हा 2005 : 2005 से अब तक रांची से सीपी सिंह लगातार पांच टर्म विधायक रहे.

हटिया-सिल्ली सीट से गोपाल शाहदेव व केशव के बाद कांग्रेस से कोई भी नहीं बना विधायक

रांची जैसा हाल हटिया विधानसभा का भी रहा है. हटिया से 2005 और 2009 में अंतिम बार गोपाल शरण नाथ शाहदेव जीते. इसके बाद हटिया से कांग्रेस को जीत नसीब नहीं हुई. अगर सिल्ली की बात करें तो वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के बाद वहां से कांग्रेस का कोई विधायक नहीं बना. महतो सिल्ली से कांग्रेस के अंतिम विधायक साबित हुए. वे 1995 में कांग्रेस के विधायक रहे.

रांची और हटिया से कांग्रेस के कोई भी दावेदारों ने नहीं खरीदा पर्चा

रांची व हटिया सीट से कांग्रेस के दावेदारों की सूची काफी लंबी है. इन सीटों पर शुक्रवार से नामांकन की प्रक्रिया और पर्चा खरीदने का काम शुरू हो गया. इन दोनों सीटों पर 13 नवंबर को वोट डाले जायेंगे. मगर कोई भी दावेदार अब तक पर्चा नहीं खरीदा है. रांची सीटों के दावेदारों को भी पता है कि रांची सीट गठबंधन के झामुमो के खाते में जायेगी.  

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