- एक दशक बाद भी सुरक्षा पर सवाल
Ranchi News : झारखंड में पादरियों, ननों, चर्चों और मिशनरी शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों पर हमले, मारपीट, धमकी और सामाजिक बहिष्कार की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. कथित धर्मांतरण का आरोप लगाकर विवाद और मारपीट किए जाने के मामले भी प्रकाश में आते रहे हैं. कई जगहों पर चर्च या शिक्षण संस्थानों में तोड़फोड़, ईसाई परिवारों को धमकी देने और सामाजिक बहिष्कार के मामले मसीही समुदाय को हैरान और स्तब्ध करते रहे हैं.
ईसाई समुदाय पर काम करने वाले संगठनों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2026 के बीच यानी 11 सालों में राज्य के अलग-अलग जिलों में इस तरह की कम से कम 150 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं. कुछ उपलब्ध विवरणों में वर्ष 2016 में 19, 2017 में 12 और 2018 में सात घटनाओं का उल्लेख मिलता है. इन आंकड़ों के अनुसार, तीन वर्षों में कुल 38 घटनाओं का दावा किया गया है. एक अन्य विवरण में वर्ष 2020 की पहली छमाही में 21 घटनाओं का उल्लेख किया गया है. वहीं, वर्ष 2021 से 2026 के बीच 50 से अधिक मामले सामने आने का दावा भी किया गया है.
2015 से 2026 तक सामने आईं कई घटनाएं
पिछले एक दशक में झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से मिशनरी संस्थानों और ईसाई समुदाय से जुड़े लोगों के संबंध में कई तरह की घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई है. इनमें से कुछ प्रमुख मामले इस प्रकार हैं.
21 अक्टूबर 2026 : खूंटी में फादर बेनेडिक्ट बारला पर हमला
खूंटी स्थित आरसी बालक मध्य विद्यालय के प्राचार्य फादर बेनेदिक्त बारला पर हुए हमले ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फादर बारला विद्यालय परिसर में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले थे. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इस घटना के विरोध में खूंटी में स्थानीय लोगों और मसीही समुदाय से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन भी किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई. घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके. फिलहाल हमले के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है. जांच के बाद ही हमले के पीछे का कारण और आरोपियों की पहचान स्पष्ट हो सकेगी.
2025 : टाटानगर स्टेशन पर नन और बच्चों को रोके जाने का मामला
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर एक नन, गैर-सरकारी संगठन के कर्मचारियों और नाबालिगों को पूछताछ के लिए रोके जाने का मामला सामने आया था. शिकायत में मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप लगाए गए थे. हालांकि पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया था.
2023 : गढ़वा में प्रार्थना के लिए पहुंचे मिशनरी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का आरोप
गढ़वा जिले में प्रार्थना के लिए पहुंचे चार लोगों के साथ कथित मारपीट की खबर एक धार्मिक समाचार संगठन ने प्रकाशित की थी. रिपोर्ट में मिशनरी कार्यकर्ताओं पर हमले का उल्लेख किया गया था.
2021 : पश्चिमी सिंहभूम में तीन आदिवासी परिवारों के सामाजिक बहिष्कार
मंगापाट सिरसाई गांव में ईसाई धर्म अपनाने वाले तीन आदिवासी परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की खबर सामने आई थी. रिपोर्टों के अनुसार, इन परिवारों को सामुदायिक गतिविधियों से अलग रखने का निर्णय लिया गया था.
मई-जून 2020 : धनबाद में धर्मांतरण के आरोपों पर विवाद
धनबाद में ईसाई प्रचारकों के साथ कथित मारपीट और उनके घरों में तोड़फोड़ की शिकायतें सामने आई थीं. शिकायतों के अनुसार, भीड़ ने उन पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था.
2020 : पश्चिमी सिंहभूम में चर्च निर्माण स्थल पर हमला
इसी वर्ष पश्चिमी सिंहभूम के बुधाकमान गांव में निर्माणाधीन चर्च को नुकसान पहुंचाने और वहां मौजूद लोगों के साथ मारपीट किए जाने की खबर सामने आई थी.
जून 2020 : खूंटी में कंडे मुंडू की हत्या
खूंटी जिले के बारी गांव में कंडे मुंडू की हत्या का मामला सामने आया था. एक ईसाई संगठन की रिपोर्ट में उनके परिवार को पहले धमकियां मिलने का भी उल्लेख किया गया था.
2020 : पलामू में ईसाई परिवारों को धमकी देने का आरोप
पलामू जिले में चर्च से जुड़े परिवारों पर कथित रूप से अपनी धार्मिक आस्था छोड़ने का दबाव बनाए जाने और धमकियां मिलने की खतबर सामने आई थी.
2020 : पश्चिमी सिंहभूम में ईसाई परिवारों के साथ कथित दुर्व्यवहार
जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में ईसाई परिवारों के साथ मारपीट और धमकियों की शिकायतों का उल्लेख धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित रिपोर्टों में किया गया था.
2020 : झारखंड के ग्रामीण इलाकों में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद
वर्ष 2020 के दौरान राज्य के ग्रामीण इलाकों में प्रार्थना सभाओं और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर विवादों की कई रिपोर्टें सामने आई थीं. कुछ मामलों में स्थानीय लोगों के विरोध और पुलिस हस्तक्षेप का उल्लेख किया गया.
2020 : खूंटी और आसपास के इलाके में धार्मिक गतिविधियों को लेकर तनाव
खूंटी और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों में धार्मिक आस्था और धर्मांतरण को लेकर सामाजिक तनाव की शिकायतें सामने आती रही हैं.
2020 के बाद : झारखंड में धर्मांतरण के आरोपों पर स्थानीय विवाद
विभिन्न जिलों में प्रार्थना सभाओं और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर विवाद, विरोध और सामाजिक दबाव की घटनाओं का उल्लेख स्वतंत्र संगठनों की रिपोर्टों में मिलता है.
सितंबर 2019 : साहिबगंज के जेसुइट कॉलेज में हिंसा
साहिबगंज जिले के मुंडली स्थित सेंट जॉन बर्कमन्स इंटर कॉलेज में भीड़ के पहुंचने, छात्रों के साथ मारपीट करने और परिसर में तोड़फोड़ किए जाने की खबर सामने आई थी.
2018 : झारखंड में मिशनरी संस्थानों से जुड़े कानूनी मामले
खूंटी के कोचांग में नाबालिग लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक मिशनरी स्कूल के फादर की गिरफ्तारी हुई थी. इसी वर्ष रांची के निर्मल हृदय से जुड़े शिशुओं की कथित बिक्री का मामला भी सामने आया था. ये आपराधिक और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े मामले थे.
साल 2015 : हजारीबाग में कैथोलिक स्कूलों में हंगामा
हजारीबाग के होली क्रॉस और सेंट जेवियर्स स्कूलों में हंगामे और तोड़फोड़ की खबरें सामने आई थीं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्कूलों को बंद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी परिसर में घुसे और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. इस मामले में 16 लोगों को हिरासत में भी लिया गया था.
धर्मांतरण के आरोपों की जांच कानून के तहत हो : रतन तिर्की
पूर्व टीएससी सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता रतन तिर्की ने कहा कि ईसाई समुदाय पर हमलों की घटनाएं चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक, पहले की तुलना में मिशनरी फादरों पर हमलों में कमी आई है. लेकिन अलग-अलग थाना क्षेत्रों से छिटपुट घटनाओं की शिकायतें अब भी सामने आती रहती हैं.
रतन तिर्की ने कहा कि कई बार धर्मांतरण का आरोप लगाकर ईसाई समुदाय के लोगों पर हमला किया जाता है. यदि किसी को जबरन धर्मांतरण की शिकायत है, तो उसकी जांच कानून के दायरे में होनी चाहिए. किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. धर्म परिवर्तन के आरोपों के आधार पर किसी के साथ मारपीट करना या कानून हाथ में लेना उचित नहीं है.
पूर्व टीएससी सदस्य ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ईसाई संस्थानों के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ईसाई समुदाय की शैक्षणिक गतिविधियों का विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और किसी भी समुदाय को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
