घुमंतू बच्चों के लिए विशेष कार्य करने की जरूरत
उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित सड़कों पर रहने वाले घुमंतू बच्चों के लिए विशेष कार्य करने की जरूरत है, ताकि वह आम बच्चों की तरह समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें. अपने अधिकारों एवं हक को सुनिश्चित कर सकें. राजेश्वरी बी ने कहा कि जो बच्चे संस्थान में रह रहे हैं और जिनकी आयु 18 साल से ऊपर हो गई है, उन्हें कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. इसे भी पढ़ें–नाबालिग">https://lagatar.in/convicts-of-gang-rape-from-minor-to-be-in-jail-till-their-last-breath/">नाबालिगसे गैंगरेप के दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा
झारखंड में बाल तस्करी एक गंभीर समस्या- डॉक्टर कनिका
यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख डॉक्टर कनिका मित्रा ने कहा कि झारखंड में बाल तस्करी एक गंभीर समस्या है. 2019 से लेकर अब तक करीब 996 बच्चों को तस्करों से मुक्त कराया गया है. मुक्त कराए गए बच्चों में 410 बच्चों की उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच है. वहीं 359 ऐसे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष है. इसके अलावा मुक्त कराये गए 126 बच्चों की उम्र 10 वर्ष से भी कम है. उन्होंने कहा कि बच्चों की समस्या का आकलन पंचायत स्तर पर किया जाए. कार्यशाला में मुख्य रूप से यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव, वर्ल्ड विजन से रेखा खलखो, बचपन बचाओ आंदोलन के श्याम मलिक, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, अनिल यादव सहायक निदेशक सर्ड,रांची के प्रतिनिधि एवं सीआईएनआई की तन्वी झा उपस्थित थीं. इसे भी पढ़ें– विरासत">https://lagatar.in/those-who-do-heritage-politics-do-not-understand-the-struggle-of-jharkhand-sudesh-mahto/">विरासतकी राजनीति करने वालों को झारखंड के संघर्ष का बोध नहीं : सुदेश महतो [wpse_comments_template]

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