Ramgarh News: पूर्व सांसद जयंत सिन्हा ने औद्योगिक हादसों, श्रमिक सुरक्षा, मुआवजा, प्रशासनिक निगरानी और प्रदूषण के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और रोजगार रामगढ़ के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास की कीमत श्रमिकों के जीवन, सुरक्षा और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के रूप में नहीं चुकाई जा सकती.
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जयंत सिन्हा ने 6 अप्रैल 2026 को झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, हेसला में हुए भट्ठी हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि हादसे में 9 श्रमिक झुलसकर घायल हुए थे, जिनमें से पांच की इलाज के दौरान मौत हो गई. उन्होंने पांच की इलाज के दौरान मौत हो गई. उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच समिति गठित की गई थी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है.
उन्होंने सवाल उठाया कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आए, किसकी जिम्मेदारी तय हुई, उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई और मृतकों के परिजनों तथा घायल श्रमिकों को मुआवजा, उपचार, पुनर्वास और अन्य वैधानिक सहायता किस सीमा तक मिली, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए.
पूर्व सांसद ने 9 अगस्त 2026 को श्रीराम पावर एंड स्टील, मुरपा-कुज्जू में हुए भट्ठी हादसे का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हादसे में नौ श्रमिक घायल हुए थे और गंभीर रूप से घायल एक श्रमिक की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई.
उन्होंने कहा कि घटना के बाद फैक्ट्री निरीक्षण और जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई थी. ऐसे में जांच की वर्तमान स्थिति, निष्कर्ष और उसके आधार पर की गई कार्रवाई को स्पष्ट किया जाना चाहिए.
मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात, हेहल से जुड़ी हालिया औद्योगिक दुर्घटना में तीन इंजीनियरों की मौत और एक कर्मचारी के घायल होने का उल्लेख करते हुए जयंत सिन्हा ने कहा कि मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे को लेकर समझौते की जानकारी सामने आई है.
उन्होंने कहा कि समझौते के अतिरिक्त यदि कोई अन्य वैधानिक लाभ देय है तो उसे भी संबंधित परिवारों को मिलना चाहिए. घायल कर्मचारी के समुचित उपचार और लागू सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों और सुरक्षा संबंधी किसी कमी पर निष्कर्ष सक्षम जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए.
जयंत सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ठेका और संविदा व्यवस्था के तहत काम करने वाले श्रमिकों के पीएफ, ईएसआई, बीमा और अन्य वैधानिक अधिकारों के अनुपालन की नियमित जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ठेकेदार के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों को भी कानून के तहत मिलने वाले सभी अधिकार और सुरक्षा मिलना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही औद्योगिक दुर्घटनाओं को देखते हुए फैक्ट्री सेफ्टी निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा होनी चाहिए. प्रशासन और संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों का अंतिम सुरक्षा निरीक्षण कब हुआ, उसमें क्या कमियां मिलीं और दिए गए सुधारात्मक निर्देशों का पालन हुआ या नहीं.
इसके अलावा श्रमिकों को सुरक्षा प्रशिक्षण और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, मशीनरी एवं सुरक्षा प्रणालियों की नियमित जांच तथा गंभीर हादसों की जांच के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाने की मांग की.
जयंत सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक हादसों को केवल अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखकर आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है. हर गंभीर दुर्घटना के बाद यह जानना जरूरी है कि हादसा क्यों हुआ, जांच में क्या सामने आया, उससे क्या सीख मिली और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए.
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