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शुभम संदेश खास: अवैध कमाई का मोतियाबिंद ऑपरेशन

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प्रदेश में आयुष्मान योजना को बनाया अवैध कमाई का जरिया कागजी आंकडा तैयार कर की करोड़ों की हेराफेरी Amit Singh Ranchi: झारखंड में प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना को षड़यंत्र के तहत अवैध कमाई का जरिया बना लिया गया है. एक सोची समझी साजिश के तहत योजना का फायदा स्वास्थ्य विभाग के अफसर और चंद अस्पताल प्रबंधन उठा रहे हैं. झारखंड आरोग्य सोसाइटी और दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की जांच में यह सामने आया है. प्रदेश के कई चर्चित अस्पताल, चैरिटेबल संस्थाओं ने योजना के तहत इलाज के नाम पर करोड़ों के वित्तीय अनियमितता को अंजाम दिया है. जांच टीम ने कहां है कि अगर मामले की उच्चस्तरीय जांच हुई, तो वित्तीय अनियमितता का दायरा व्यापक हो सकता है. प्रदेश में जांच कर रही टीम को पता चला है कि योजना राशि लूटने के लिए कागजों पर मोतियाबिंद ऑपरेशन दर्शाया गया है. इसमें फर्जी दस्तावेज का भी सहारा लिया गया है. ज्यादातर अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत सिर्फ मोतियाबिंद का ही ऑपरेशन हुआ है. इतना ही नहीं, ज्यादातर अस्पतालों ने इजाल के लिए मोतियाबिंद को ही चुना है. जबकि उन अस्पतालों में कई अन्य गंभीर बीमारियों के भी इलाज होते हैं. जांच शुरू हुई होने के पहले प्रदेश में आयुष्मान योजन के तहत मोतियाबिंद के ऑपरेशन का आकड़ा 54 प्रतिशत तक पहुंच गया था. जांच के बाद यह आंकड़ा घटकर 20 से 25 प्रतिशत तक हो गया.

5 साल में हुए 3.80 लाख आंखों के ऑपरेशन

झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी करते हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद भी मरीजों को हो रही परेशानियों का जिक्र किया है. प्रदेश में करीब 110 डॉक्टरों ने मिलकर पांच साल में 3.80 लाख लोगों की आंखों का ऑपरेशन किया, विभाग ने पहली नजर में इसे अत्यंत गंभीर और संवेदनशील बताया है. इस वित्तीय अनियमितता की जांच प्रमंडल स्तर पर क्षेत्रीय उप निदेशक की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति कर रही है. सभी जिले के सिविल सर्जन और सदर अस्पताल से आंख का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों का आंकड़ा उपलब्ध कराने को कहा गया है.

जांच शुरू होते ही घट गया ऑपरेशन का आंकड़ा

मजेदार बात यह है कि गड़बड़ी की बात सामने आई, जांच शुरू हुई तो प्रदेश के 13 जिलों में मोतियाबिंद ऑपरेशन का आंकड़ा शून्य के करीब पहुंच गया. इन जिलों में चतरा ,गढ़वा, देवघर, दुमका ,हजारीबाग, जामताड़ा, कोडरमा, लातेहार, पलामू, रामगढ़, सरायकेला और सिमडेगा शामिल हैं. जबकि इन जिलों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज हुए, उसमें 41 प्रतिशत मोतियाबिंद का ऑपरेशन का था. यह आंकड़ा अक्तूबर 22 में 38 प्रतिशत, नवंबर 22 में 53 प्रतिशत, दिसंबर 22 में 51 प्रतिशत, जनवरी 2023 में 51 प्रतिशत, फरवरी 23 में 55 प्रतिशत था. जांच शुरू हुई, कुछ नियमों में बदलाव होने के बाद अगस्त 23 में यह आंकड़ा घटकर 26 प्रतिशत पर पहुंच गया. वर्तमान में यह आंकड़ा पांच प्रतिशत तक पाया जा रहा है. राजधानी में 0.9प्रतिशत ही मोतियाबिंद का आंकड़ा पाया गया. वहीं गोड्डा में 1.50 प्रतिशत, पाकुड में 9 प्रतिशत, पश्चिमी सिंहभूम में 1 प्रतिशत और साहिबगंज में 7 प्रतिशत मोतियाबिंद का आंकड़ा पहुंच गया है. इन पांच जिलों के अलावा अन्य किसी भी जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए कुल इलाज के ऑपरेशन का आंकड़ा एक प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाया है.

धनबाद में राशि हड़पने के लिए ऑपरेशन का कागजी दावा

जांच के बद धनबाद में मोतियाबिंद का आंकड़ा तीन प्रतिशत पर पहुंचा गया है. इतना ही नहीं, जांच में पता चला है कि धनबाद में बंद पैथोलॉजिकल क्लीनिक के नाम पर सर्टिफिकेट लेकर एक क्लीनिक ने कई मरीजों का ऑपरेशन करने का कागजी दावा प्रस्तुत किया है. इतना ही नहीं, एक ही डॉक्टर के हस्ताक्षर से एक ही समय में कई मरीजों का ऑपरेशन किया गया. जांच में यह भी पता चला है कि आयुष्मान योजना के तहत इलाज वाले पंजीकृत अस्पताल ज्यादा से ज्यादा बीमा कंपनियों से राशि की निकासी के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. मोतियाबिंद के ऑपरेशन के नाम पर खूब खेला हो रहा है.

पलामू, गढ़वा में बिना इलाज कर दिया गया ऑपरेशन

पलामू में एक अस्पताल द्वारा बीमा क्लेम के आधार पर करोड़ों के वित्तीय अनियमितता का अंजाम देने की बात समाने आ रही है. एक बीमा कंपनी ने एनआईसी की ओर से समर्पित बेनिफीसरी फीडबैक कॉलिंग रिपोर्ट के अनुसार एबी-पीएमजेएसवाई के तहत सूचीबद्ध अस्पताल की ओर से 26 ओप्थल के मरीजों का केस अस्तपाल से ब्लॉक कर उसकी सर्जरी गढ़वा जिला में की गई. जबकि नियमत यह है कि अस्पताल दूसरे जिले में जाकर मोतियाबिंद का आपरेशन नहीं कर सकते हैं. 21 मरीज ऐसे सामने आए है, जिनका इजाल पलामू में हुआ और ऑपरेशन गढ़वा में किया गया है. जांच में यह भी पता चला है कि जिन मरीजों की आंख का ऑपरेशन हुआ, वे कभी पलामू इजाल के लिए आए ही नहीं है. मरीजों के अनुसार गढ़वा के रंका में उनका ऑपरेशन किया गया. [wpse_comments_template]  

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