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सरना-सनातन विवाद को लेकर बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर हमला, कहा, समाज को बांटने की राजनीति बंद हो

Ranchi :  झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरना, सनातन और हिंदू अलग-अलग नहीं,  बल्कि एक ही सांस्कृतिक परंपरा के हिस्से हैं. उन्होंने कहा कि तीनों प्रकृति पूजक हैं और पेड़, पहाड़, जल, धरती तथा अन्य प्राकृतिक शक्तियों की पूजा करते हैं.

 

उन्होंने कहा कि झारखंड की अलग-अलग जनजातियों की परंपराएं और देवी-देवता सनातन परंपरा की विविधता को ही दर्शाते हैं. वे भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे. इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद भी मौजूद  थे. 

 

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का इतिहास समाज को बांटने की राजनीति से जुड़ा रहा है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का गठन अंग्रेजों ने 1857 के विद्रोह के बाद सेफ्टी वाल्व के रूप में किया था.

 

उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने आजादी के बाद कांग्रेस को समाप्त करने की सलाह दी थी, लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए ऐसा नहीं किया गया.

 

धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर मरांडी ने कहा कि हिंदू बनना कोई प्रक्रिया नहीं है, जबकि अन्य धर्मों में धर्म परिवर्तन की अलग प्रक्रिया होती है.

 

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के ईसाई या मुस्लिम बनने पर कांग्रेस और झामुमो चुप रहते हैं, लेकिन भाजपा पर गलत आरोप लगाए जाते हैं.

 

उन्होंने वर्तमान राज्य सरकार पर पेसा कानून की नियमावली को कमजोर करने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक सरकार ने पारंपरिक आदिवासी अधिकारों से जुड़े कई प्रावधानों के साथ छेड़छाड़ की है.

 

बाबूलाल मरांडी ने सरकार से सरना, मसना, हरगड़ी और पहनाई जैसी आस्था स्थलों की जमीन को भू-माफियाओं से बचाने और उनके संरक्षण की मांग की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों के दौरान इन स्थलों के विकास और घेराबंदी का काम शुरू किया गया था.

 

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