Ranchi News : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL मामले में चल रही CID जांच को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि जांच की कार्रवाई अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी तक सीमित दिखाई दे रही है.
JSSC-CGL मामले में जिस तरह से CID की जांच सिर्फ अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी तक सीमित दिखाई दे रही है, उससे यही लगता है कि एक बार फिर लोगों को गुमराह किया जा रहा है और बड़े साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिश हो रही है।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) September 29, 2026
मुख्यमंत्री के मित्र विनोद सिंह के पास CGL के एडमिट कार्ड…
उन्होंने बड़े साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच नहीं होने का आरोप लगाया. मरांडी ने दावा किया कि विनोद सिंह के पास CGL के एडमिट कार्ड मिलने की बात सामने आई थी. लेकिन CID ने उनसे पूछताछ नहीं की.
मरांडी ने कहा कि गिरिडीह परीक्षा घोटाले का हॉटस्पॉट बनाकर उभरा है. वहां से कई लोगों की गिरफ्तारियां हुई. लेकिन अब तक वहां के झामुमो नेताओं से पूछताछ नहीं हुई, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
उन्होंने सीएम से सवाल करते हुए कहा कि इतने बड़े कथित परीक्षा घोटाले में केवल अभ्यर्थियों और एजेंटों को ही जिम्मेदार मानना कैसे संभव है. मरांडी ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों का भरोसा तभी कायम होगा, जब जांच छोटे स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क तक पहुंचे.
मरांडी ने अपने पोस्ट में अनुराग गुप्ता, सुधीर गुप्ता, नीरज सिन्हा, मनोज कौशिक, प्रशांत कुमार और विनोद सिंह की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने और उन्हें पद पर बनाए रखने की क्या वजह है.
भाजपा नेता ने कहा कि आम लोगों के बीच इस मामले को लेकर कई सवाल और जिज्ञासाएं हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि CID जांच पर तब तक भरोसा कायम नहीं होगा, जब तक जांच की पहुंच केवल छोटे आरोपियों तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों तक नहीं होती.
बाबूलाल मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि जांच की दिशा व्यापक नहीं हुई तो जनता के बीच यह धारणा बन सकती है कि जांच भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है.