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बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
बाबूलाल ने आगे लिखा है कि इनके बीच गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पीने का पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. कुपोषण, एनीमिया, मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियां इनके जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं. पहाड़िया समाज के उत्थान के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ भी अधिकतर बिचौलिये हड़प लेते हैं. मैं इन पहाड़ी क्षेत्रों का लगातार दौरा करता रहा हूं और उनकी दयनीय स्थिति को देखकर यह साफ जाहिर होता है कि उनकी हालत बेहद चिंताजनक है. अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि झारखंड की आदिम जनजातियों, विशेषकर पहाड़िया समाज के समग्र उत्थान के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए. समिति द्वारा किए गए सर्वेक्षण और सिफारिशों के आधार पर एक वर्ष की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके. इस महत्वपूर्ण विषय पर अगले कैबिनेट में निर्णय लेकर विशेष समिति बनाकर पहाड़िया जनजाति के गांवों में ज़मीनी सच्चाई देखने भेजेंगे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर पुण्य का भागी बनेंगे. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/loan-waiver-of-4-79-lakh-farmers-of-jharkhand/">झारखंडके 4.79 लाख किसानों का ऋण माफ [wpse_comments_template]
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