Dhanbad : बागडिगी खान हादसा की 21 वीं बरसी 2 फरवरी को मनाई गई. 2 फरवरी 2001 को धनबाद के झरिया स्थित लोदना एरिया की बागडिगी कोलियरी के 12 नम्बर खदान में अचानक हाहाकार मच गया था, जब डैम की दीवार अचानक फट गई थी और खदान जल मग्न हो गया. उस समय खदान में 29 श्रमिक काम कर रहे थे, जो अचानक आई इस जल प्रलय में फंस गए. खबर जंगल में आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई. इलाके में चीख पुकार मच गई. परिजनों के चीत्कार से कोलियरी का इलाका गमगीन हो गया.. लोगों का हुजूम चानक के समीप पहुंच गया था. सभी लोग जल्द बचाव कार्य की मांग कर रहे थे.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/02/bag-colliery-300x171.jpeg"
alt="" width="300" height="171" /> बंद चानक, सुना रहा दहशत की दास्तान[/caption]
: एक दर्जन से ज्यादा की मौत, पांच शव मिले, दस घायल [wpse_comments_template]
जल प्रलय में 29 श्रमिकों ने गंवाई जिंदगी, परिजन थे बेहाल
बीसीसीएल के वरीय अधिकारी, तत्कालीन उपायुक्त वी किस्पोट्टा, एसपी अब्दुल गनी मीर व पूर्व मंत्री बच्चा सिंह को जानकारी मिली और सभी आनन फानन घटनास्थल पर पहुंच गए. बीसीसीएल अधिकारियों के साथ जिला प्रशाससन के अधिकारी व मंत्री भी पहुंचे और खदान में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू कराया. परंतु खदान में पानी के बहाव के आगे किसी की नहीं चली. बीसीसीएल की रेस्क्यू टीम ने जब हाथ खड़े कर दिये तो मुंबई से गोताखोरों की टीम को बुलाया गया. चार दिन की खोज के बाद भी गोताखोरों को कुछ हाथ नही लगा. इधर परिजनों के बीच आक्रोश उफान पर था. पांच फरवरी को गोताखोरों की टीम जब उस स्थल पर पहुंची तो उन्हें श्रमिकों के शव मिले. रात 12 बजे गोताखोरों की टीम ने शवों को खदान से बाहर निकाला. शवों की पहचान कैप लैंप नंबर से की गई थी.सात दिन तक मौत से जूझ कर जीवित निकले थे सलीम
हालांकि इस हादसे में सलीम अंसारी नामक श्रमिक सात दिन तक मौत से जूझते हुए जीवित निकाले गए थे. गोताखोरों की टीम ने उन्हें बाहर निकाला. वह 7 दिन तक खदान का गंदा पानी पीकर मौत से संघर्ष करते रहे. स्वस्थ होने के बाद सलीम ने मीडिया को बताया था कि सात नंबर सिम में उनकी ड्यूटी थी. तभी जोरदार आवाज हुई और अचानक खदान में पानी भरने लगा. वह किसी तरह भागकर एक कोयले के ढेर पर चढ़ गए, जहां सात दिनों तक बिना कुछ खाए-पीये पड़े रहे. बचाव टीम तक उनकी आवाज पहुंच ही नहीं रही थी. उन्होंने कहा कि उनके सामने कई श्रमिक साथियों की मौत पानी में डूबने से हो गई. सलीम अगस्त 2006 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं. आज भी इस हादसे को याद कर यहां के लोगों का कलेजा सिहर उठता है. [caption id="attachment_233935" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="171" /> बंद चानक, सुना रहा दहशत की दास्तान[/caption]
मिली सीख,सुरक्षा को नजरंदाज करना घातक : जी एम
एक फरवरी को स्मारक स्थल पर तैयारी का जायजा लेने पहुंचे तो क्षेत्र संख्या 10 के महाप्रबंधक अरुण कुमार, परियोजना पदाधिकारी एम कुंडू, बागडिगी कोलियरी के प्रबंधक एन के राणा वहां मौजूद थे. महाप्रबंधक अरुण कुमार ने लगातार के संवादाता को बताया कि धनबाद, झरिया की लोदना क्षेत्र संख्या 10 अंतर्गत बागडिगी कोलियरी में 2 फरवरी 2001 को जल प्रलय हुई थी, जिसमें अधिकारी सहित 29 कामगारों ने डूब कर जान गंवाई. 21 वर्ष बाद भी इस घटना को याद कर रूह कांप जाती है. उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्हें सीख मिली कि सुरक्षा को नजरअंदाज कर कभी भी माइंस नहीं चलाना चाहिए. सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कभी भी 29 शहीदों के बलिदान को नही भूलेंगे, जिन्होंने कोयला उत्खनन के दौरान अपनी जान न्योछावर कर दी.तत्कालीन कोयला मंत्री भी आए थे, अब बंद हो गई है खदान
हादसे के बाद तत्कालीन कोयला मंत्री रामविलास पासवान भी बागडिगी पहुंचे थे. उन्होंने बीसीसीएल के तत्कालीन सीएमडी से घटना की जानकारी ली थी. उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की बात भी कही थी. इस हादसे के कुछ साल बाद बागडिगी खदान को भूमिगत आग के कारण बीसीसीएल प्रबंधन ने बंद कर दिया है .दोनों खदानों के चानक की भराई भी हो चुकी है. यह भी पढ़ें : निरसा">https://lagatar.in/nirsa-more-than-a-dozen-dead-five-bodies-found-ten-injured/">निरसा: एक दर्जन से ज्यादा की मौत, पांच शव मिले, दस घायल [wpse_comments_template]
Leave a Comment