Bahragora (Himangshu karan) : बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के मटिहाना और कुंवरदा गांव में कुम्हारों के चाक की घूमने की गति थम सी गई है. यहां की युवा पीढ़ी अपने पुश्तैनी धंधे को छोड़ रही है. दीपावली में 10 से 15 परिवार ही मिट्टी के दीये एवं बर्तन बनाने में जुटी है. यहां लगभग 150 परिवार निवास करते हैं. पूर्व में सभी परिवार मिट्टी के बर्तन बनाते थे. वर्तमान समय में लगभग 135 परिवार मिट्टी के बर्तन व अन्य सामान बनाना छोड़ दिए हैं. महंगाई की मार के कारण इस व्यवसाय में नयी पीढ़ी आना नहीं चाहती है. युवा पीढ़ी मजदूरी कर रहे हैं. इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि अब लोगों में आधुनिक चीजों में रूचि बढ़ गई है.
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alt="" width="600" height="400" /> मिट्टी के बर्तन और दीये का कोई उपयोग करना नहीं चाह रहे हैं. दीये जलाने के लिए तेल की कीमत में भी वृद्धि हुई है, जिसके कारण लोगों में चाइना लाइट के प्रति रुचि बढ़ी है. स्वदेशी अपनाओ का नारा भी धीरे-धीरे विफल होता जा रहा है. पहले की तरह मिट्टी के सामान की बिक्री दीपावली में नहीं हो रही है. इसके कारण कई परिवार अपना पुश्तैनी धंधा छोड़ चुके हैं. वहीं सरकार द्वारा इन कुम्हारों को कोई सहायता भी नहीं मिल रही है. इससे वे अपने पुश्तैनी धंधा छोड़ रहे हैं. [wpse_comments_template]
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