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बालू के अवैध उत्खनन से बाढ़ का खतरा बढ़ा
प्रखंड क्षेत्र के सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित इलाके में स्वर्णरेखा नदी में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उत्खनन हो रहा है. नदी के किनारे बालू से लदे भारी वाहनों के परिचालन से नदी का किनारा कमजोर हो रहा है. इसके कारण स्वर्णरेखा नदी का पानी किनारे को तोड़कर इलाके में प्रवेश करता है. इससे इलाके में भारी तबाही मचती है. बाढ़ की रोकथाम के लिये स्वर्णरेखा नदी में महुलडांगरी, बामडोल, मधुआबेड़ा और गुहियापाल के पास तटबंध का निर्माण हुआ है. कई जगहों पर नदी के किनारे पौधा रोपण के कार्य भी हुए हैं. परंतु यह काफी नहीं रहा माना जा रहा है. खास बात यह है कि बाढ़ में सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन पूर्व में कोई तैयारी नहीं करता है. इसलिए बाढ़ आने पर अफरातफरी मच जाती है.इन पंचायतों में बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव
[caption id="attachment_321304" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="240" /> बाढ़ से जलमग्न गांव और रंगड़ो खाल के पानी से घिरे प्रतापपुर के ग्रामीण. फाइल फोटो[/caption] बरसात में जब स्वर्ण रेखा नदी उफान मारती है तो प्रखंड की बहुलिया, बरागड़िया, पाथरी, बनकांटा, डोमजुड़ी, गुहियापाल पंचायत के गांवों में सर्वाधिक तबाही मचती है. धान और सब्जी की फसल के लिये विख्यात बहरागोड़ा में बाढ़ से फसलें पानी में डूब कर बर्बाद हो जाती हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. गांवों में पानी के प्रवेश होने से मिट्टी के घर ध्वस्त हो जाते हैं. ग्रामीणों को नाव के सहारे किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है. क्षेत्र के कई पुल और पुलिया ध्वस्त हो जाते हैं तथा सड़कें बह जाती हैं. कई गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं. स्वर्णरेखा नदी की बाढ़ से हर साल 25 से 50 फुट तक मिट्टी की कटाई होती है और खेत स्वर्णरेखा नदी में समा जाते हैं. बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव बहुलिया पंचायत के गांव में देखा जाता है. पंचायत में चित्रेश्वर के पौराणिक शिव मंदिर जाने वाली सड़क भी जल मग्न हो जाती है. वहीं महुलडांगरी, बामडोल और गुहियापाल के पास नदी के बहाव से खेतों की मिट्टी कटती है. इसे भी पढ़ें: चाकुलिया:">https://lagatar.in/chakulia-forest-department-will-send-a-proposal-for-underpass-fence-and-elephant-protection-trench-to-protect-wild-elephants-from-the-train/">चाकुलिया:
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