Baharagora (Himangshu Karan) : बहरागोड़ा से सटे पश्चिम बंगाल और झारखंड की सीमा पर 50 से अधिक जंगली हाथी खदेड़े जाने की वजह से मुश्किल में
पड़े हैं. आखिर वे जाएं तो कहां
जाएं? बंगाल जाने पर वहां से वन विभाग के कर्मचारी और झारखंड सीमा में घुसने पर ग्रामीण
खदेड़ रहे
हैं. इस भागम भाग की स्थिति में जंगली हाथी और ज्यादा उग्र होते जा रहे
हैं. हाथियों और इंसानों के बीच एक जंग शुरू हो गई
है. विगत कई दिनों पूर्व पश्चिम बंगाल सीमा से वन विभाग और ग्रामीणों ने 50 से अधिक हाथियों को
बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के
लुगाहारा के आसपास के जंगलों में
खदेड़ दिया
था. इन हाथियों के कारण
लुगाहारा और उसके आसपास के गांवों के ग्रामीण दहशत में जी रहे
थे. हाथियों के कारण जनजीवन ठप हो गया
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: द प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला-खरसावां की नई कार्यकारिणी का विस्तार हाथियों को खदेड़ने में जुटी है टीम
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प्रभारी वन क्षेत्र पदाधिकारी दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम के 40 सदस्य विगत शनिवार की शाम को
लुगाहारा के पास जुटे और ग्रामीणों के साथ हाथियों को बंगाल सीमा में
खदेड़ने में रात भर लगे
रहे. कुछ देर के लिए राष्ट्रीय उच्च पथ 49 पर आवागमन को बंद कर कुछ हाथियों को पश्चिम बंगाल सीमा में
खदेड़ा गया. जबकि बाकी के हाथी इसी क्षेत्र में जमे हुए
हैं. रविवार को भी वन विभाग की टीम और ग्रामीण हाथियों को
खदेड़ने में जुटे
हैं. वन क्षेत्र पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने बताया कि हाथियों को
खदेड़ने के लिए वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम और ग्रामीण जुटे हुए
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: तिरुपति बालाजी के ‘अन्न प्रसादम्’ में केंद्रीय मंत्री समेत शामिल हुए सैकड़ो लोग ट्रेन से कटकर हो चुकी है हाथियों की मौत
चाकुलिया वन क्षेत्र में वर्ष 2018 से जंगली हाथियों और इंसानों के बीच की जंग जारी
है. पश्चिम बंगाल और झारखंड सीमा पर जंगल होने के कारण यह इलाका हाथियों का जोन बन गया
है. हाथी बंगाल सीमा में जाते हैं तो वहां से
खदेड़ कर झारखंड सीमा में पहुंचा दिए जाते
हैं. फिर यहां से
खदेड़ कर बंगाल सीमा में पहुंचा दिए जाते
हैं. यह सिलसिला वर्षों से जारी
है. इस
भागदौड़ के कारण जंगली हाथी उग्र होते गए और कुछ ज्यादा ही उपद्रव मचाने
लगे. वर्ष 2018 से लेकर अब तक चाकुलिया वन क्षेत्र में जंगली हाथियों के हमले से 21 लोगों की मौत हो चुकी
है. वहीं हाथियों द्वारा
सैकड़ों घरों को
तोड़ा गया और खेती को भारी नुकसान पहुंचाया
गया. इस भागमभाग में चार जंगली हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत भी हो चुकी
हुई. तीन हाथियों की मौत वर्ष 2018 में पश्चिम बंगाल में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के धक्के से हुई थी. वर्ष 2020 में एक हाथी की मौत चाकुलिया के
कोकपाड़ा स्टेशन के पास ट्रेन की चपेट में आने से हो गई
थी. एक तरह से कहा जाए तो चाकुलिया वन क्षेत्र के लिए जंगली हाथी एक त्रासदी बन गए
हैं. फिलहाल जंगली हाथी और इंसानों के बीच जंग परवान चढ़ती जा रही
है. [wpse_comments_template]
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