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रास्ते में ही हो जाती है कई घायलों की मौत
पिछले मार्च माह की बात की जाए तो विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में 16 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए. इन्हें इलाज के लिए 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो लाया गया. परंतु इनमें 13 लोगों का प्राथमिक उपचार कर 108 एंबुलेंस से ओडिशा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया. वहीं तीन घायलों को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया. यहां उल्लेखनीय है कि बहरागोड़ा से बारीपदा की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है जबकि जमशेदपुर की दूरी 90 किलोमीटर है. वहीं पश्चिम बंगाल के अस्पताल की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है. इस परिस्थिति में रेफर करने के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचने में विलंब हो जाती है और रास्ते में ही कई घायलों की मौत हो जाती है. ऐसा कई मौकों पर हुआ है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-all-works-of-subarnarekha-project-on-track-till-2027-chief-engineer/">आदित्यपुर: 2027 तक सुवर्णरेखा परियोजना के सभी कार्य पटरी पर : मुख्य अभियंता
ट्रामा सेंटर दर्शन की वस्तु बनकर रह गया
बहरागोड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों और चिकित्सकों की कमी है. एनएच पर हो रही दुर्घटनाओं में घायलों के इलाज के लिए ही तत्कालीन विधायक डॉ. दिनेश कुमार षाड़ंगी की पहल से माटिहाना के पास निर्मित ट्रामा सेंटर दर्शन की वस्तु बनकर रह गया. इस ट्रामा सेंटर का उद्घाटन वर्ष 2013 में हुआ था. तब से लेकर आज तक इस ट्रामा सेंटर में चिकित्सा की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकी. फिलहाल ट्रामा सेंटर में ताला बंद है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उत्पल मुर्मू इस मसले पर कहा कि सीएचसी में चिकित्सकों और संसाधनों की कमी है. जांच के लिए कई आवश्यक उपकरण नहीं हैं. इसलिए गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करना पड़ता है. इसे भी पढ़ें :चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-municipal-council-will-make-organic-fertilizer-from-wet-waste/">चाईबासा: नगर परिषद गीले कचरे से बनाएगी जैविक खाद [wpse_comments_template]

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