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बहरागोड़ा : साहब! डोमजुड़ी मध्य विद्यालय कैदखाना है या विद्यालय?

Bahragora (Himangshu karan) : शिक्षितों का प्रखंड कहे जाने वाले बहरागोड़ा प्रखंड में डोमजुड़ी मध्य विद्यालय, स्कूल है या फिर कैदखाना है? यह समझ से परे है. इस विद्यालय में बच्चे क्लास रूम में भेड़-बकरियों की तरह बैठकर घुटन भरे माहौल में पढ़ते हैं. एक कमरे में बहु वर्गीय कक्षा चलती है. यानि कि एक कमरे में तीन वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं. बरामदे में भी बच्चों को पढ़ाने की मजबूरी बन गई है. वर्ग कक्षा के कोने में शौचालय का निर्माण किया गया है. प्रधानाध्यापक का कार्यालय गोदाम में तब्दील है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/Bahragora-Domjudi-School-1.jpg"

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विद्यालय की सोलर जलापूर्ति योजना खराब है. बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन दूसरे की खलिहान में बनाया जाता है. विद्यालय के पास स्थित सरकारी चापानल से पानी लेना पड़ता है. ऐसी स्थिति इसलिए है कि इस मध्य विद्यालय में सिर्फ चार ही कमरे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस विद्यालय की दुर्दशा की ओर जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों का ध्यान नहीं है. इसे भी पढ़ें : News11">https://lagatar.in/news11-bharat-owner-arup-chatterjee-gets-bail-walks-out-of-jail/">News11

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alt="" width="600" height="318" /> विद्यालय के लिए सिर्फ चार डिसमिल ही जमीन है. इसी जमीन पर विद्यालय भवन है. लिहाजा अंदाज लगाया जा सकता है कि कैसी विकट परिस्थितियों में विद्यालय के शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं. इस विद्यालय में 222 विद्यार्थी नामांकित हैं. इनमें 102 बालिका और 120 बालक हैं. तीन शिक्षक पदस्थापित हैं. कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है. एक कमरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय और गोदाम है. इसी कक्ष के कोने में छात्राओं के लिए शौचालय बनाया गया है. शेष तीन कमरे में कक्षाएं चलती हैं. इसे भी पढ़ें : चाकुलिया">https://lagatar.in/chakulia-harinam-sankirtan-committee-honored-the-mla-by-giving-him-organ-clothes/">चाकुलिया

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एक कक्षा के कोने में छात्रों के लिए शौचालय बनाया गया है. जगह के अभाव में किचन शेड नहीं बना है. इसलिए बच्चों का मध्याह्न भोजन विद्यालय के पास स्थित सुखेन मंडल नामक ग्रामीण की खलिहान में एक झोपड़ी में बनाया जाता है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक बासक चंद्र नायक ने बताया कि विद्यालय को संचालित करने में बड़ी परेशानी हो रही है. इस संबंध में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को कई बार सूचित किया जा चुका है. विद्यालय में जगह का घोर अभाव है. बच्चों को खेलने-कूदने के लिए भी जगह नहीं है. [wpse_comments_template]

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