Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने साइबर अपराध से जुड़े मामले में फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग कर एक महिला विधायक पर गंभीर, अपमानजनक और जेंडर आधारित हमले करने के आरोपी सहदेव उरांव की जमानत याचिका खारिज कर दी.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनुभव रावत चौधरी की कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस तरह का आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिसमें खासकर महिला जनप्रतिनिधि को निशाना बनाया गया.
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की हरकत से व्यक्ति की गरिमा पर सीधा आघात होता है. इसलिए जमानत देने योग्य मामला नहीं बनता है. हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है.
कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह गवाहों को शीघ्र प्रस्तुत करें और ट्रायल को जल्दी पूरा करें. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी एफआईआर में मिली जमानत का इस मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस आदेश की प्रति निदेशक अभियोजन और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश भी दिया.
यहां बता दें कि इस मामले में साइबर थाना रांची में कांड संख्या 239/ 2025 दर्ज किया गया है.इससे पहले याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि सहदेव उरांव 6 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है.
यह भी कहा कि आरोपी के पास से केवल एक सिम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुआ है. अधिकांश धाराएं जमानती प्रकृति की हैं. वहीं, राज्य की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि केस डायरी से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने एक फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग कर एक महिला विधायक को निशाना बनाया.
सरकार ने तर्क दिया कि फर्जी डिजिटल पहचान का सहारा लेकर किए गए अपमानजनक और लैंगिक आधार पर हमले मामले की गंभीरता को और बढ़ाते हैं.
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