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बकोरिया कांड : 4 साल में सात बार घटनास्थल पर जांच करने पहुंची CBI , नहीं सुलझ पायी 12 लोगों के मारे जाने की गुत्थी

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Ranchi : पलामू जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में 8 जून 2015 को कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई थी. इसमें 12 लोग मारे गये थे. पिछले 4 साल में इस मामले की जांच करने के लिए सीबीआई की टीम सात बार पलामू आ चुकी है. लेकिन 12 लोगों को किसने मारा है,इसकी गुत्थी अबतक नहीं सुलझ पायी है. पढ़ें - मांडर">https://lagatar.in/mandar-by-election-congress-is-ahead-of-4957-votes-in-the-seventh-round-bjp-has-got-24617-votes/">मांडर

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हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई इस मामले की जांच 22 अक्टूबर 2018 से कर रही है.जबकि बकोरिया में मुठभेड़ 8 जून 2015 को हुई थी. इसमें पुलिस ने 12 नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया था. बाद में परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया  मारे गए लोगों में दो नाबालिग व एक पारा शिक्षक के भी शामिल होने की बात आई है. इसे भी पढ़ें - बॉक्स">https://lagatar.in/jug-jug-jio-is-rocking-the-box-office-did-business-of-12-crores-on-the-second-day/">बॉक्स

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डॉ आरके के अलावा किसी का कोई नक्सल रिकॉर्ड नहीं था

कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मारे गये 12 लोगों को पुलिस ने माओवादी बताया और अपनी पीठ थपथपा ली. शर्मनाक यह रहा कि पुलिस ने इस मुठभेड़ के बदले इनाम भी बांटे. लेकिन कुछ ही दिनों में यह मुठभेड़ सवालों के घेरे में आ गया. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय पर फर्जी एनकाउंटर कराने का आरोप लगने लगा. काफी हो-हंगामे के बाद मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गयी. लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी मुठभेड़ में मारे गये लोगों के परिजनों को इंसाफ नहीं मिल पाया है. पुलिसिया जांच में यह बात सामने आयी थी कि मारे गये 12 लोगों में से सिर्फ डॉ आरके उर्फ अनुराग के अलावा किसी का कोई नक्सल रिकॉर्ड नहीं था. इसे भी पढ़ें - अरबपतियों">https://lagatar.in/big-reshuffle-in-the-list-of-billionaires-gautam-adani-jumps-to-6th-position-mukesh-ambani-slips-to-10th/">अरबपतियों

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