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बकोरिया कांड : साढ़े 4 साल में 8 बार जांच को गयी CBI, मगर गुत्थी नहीं सुलझी

Ranchi : पलामू जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में 8 जून 2015 को कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई थी. इसमें 12 लोग मारे गये थे. पिछले साढ़े चार साल में इस मामले की जांच करने सीबीआई टीम आठ बार पलामू का दौरा कर चुकी है. लेकिन 12 लोगों को किसने मारा है, इसकी गुत्थी अबतक नहीं सुलझ पायी है. इसे भी पढ़ें - पिता">https://lagatar.in/father-filed-a-case-of-rape-the-girl-refused-the-court-released-the-accused/">पिता

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तत्कालीन डीजीपी, आईजी, डीआइजी, एसपी, समेत 400 से अधिक लोगों का बयान है दर्ज

सीबीआई की टीम अब तक मामले में झारखंड के तत्कालीन डीजीपी, आईजी, डीआइजी, एसपी, मीडिया समेत 400 से भी अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है. जानकारी के मुताबिक, सीबीआई पुलिस और सुरक्षा से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल करेगी. 8 जून 2015 को भलूवही घाटी में मारे गए सभी 12 लोगों के शवों का वीडियो फोटो वायरल हुआ था. उस दौरान सीआरपीएफ समेत अन्य जवानों ने शवों की वास्तविक स्थिति की फोटो खींची थी. सीबीआई ने सीआरपीएफ और अन्य जवानों के मोबाइल से सारे फोटो रिकवर कर लिए हैं और उसकी जांच हो रही है.

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच

हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई इस मामले की जांच 22 अक्टूबर 2018 से कर रही है. जबकि बकोरिया में मुठभेड़ 8 जून 2015 को हुई थी. इसमें पुलिस ने 12 नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया था. बाद में परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए हाईकोर्ट की शरण ली थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया, मारे गए लोगों में दो नाबालिग व एक पारा शिक्षक के भी शामिल होने की बात आयी है.

डॉ आरके के अलावा किसी का कोई नक्सल रिकॉर्ड नहीं था

कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मारे गये 12 लोगों को पुलिस ने माओवादी बताया और अपनी पीठ थपथपा ली. शर्मनाक यह रहा कि पुलिस ने इस मुठभेड़ के बदले इनाम भी बांटे. लेकिन कुछ ही दिनों में यह मुठभेड़ सवालों के घेरे में आ गया. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय पर फर्जी एनकाउंटर कराने का आरोप लगने लगा. काफी हो-हंगामे के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गयी. लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी मुठभेड़ में मारे गये लोगों के परिजनों को इंसाफ नहीं मिल पाया है. पुलिसिया जांच में यह बात सामने आयी थी कि मारे गये 12 लोगों में से सिर्फ डॉ आरके उर्फ अनुराग के अलावा किसी का कोई नक्सल रिकॉर्ड नहीं था. इसे भी पढ़ें - पलामू">https://lagatar.in/palamu-sdo-and-dmo-conducted-late-night-vehicle-checking-campaign-seized-12-trucks-carrying-illegal-chips/">पलामू

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