: देवरी मस्जिद में तरावीह की नमाज संपन्न, खुदा से अपनी खुशहाली की मांगी दुआ
नमाज-ए-तरावीह की अलग अहमियत- मौलाना अब्दुल वाजिद
लातेहार जिला जमीयत-ए-उलेमा के सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल वाजिद ने बताया कि रमजान के चांद नजर आने के बाद शुरू होने वाले नमाज-ए-तरावीह की एक अलग अहमियत है. इसमें मुसलमान दिन में रोजा रखने के बाद रात की नमाज के उपरांत घंटों खड़े होकर अपने रब को राजी करने के लिए नमाज-ए-तरावीह का एहतेमाम करता है. मौलाना जुबैर कासमी ने कहा कि तमाम महीनों में रमज़ान का महीना सबसे अफजल है. अल्लाह इस महीने में अपने बंदों के लिए अजर बढ़ा देता है. एक नेकी के बदले कई नेकियों से अल्लाह नवाजता है. मस्जिद-ए-मुस्तफा के इमाम मौलाना तौकीर अफनदी ने बताया कि बरकतों और रहमतों के माह-ए-रमजान में अल्लाह ने खास तौर पर गरीबों का ख्याल रखने का हुक़्म दिया है. गरीबों की ज़रूरतों का ख्याल रखना हर साहब-ए-निसाब के लिए ज़रूरी है. ज्ञात हो कि रमजान के पूरे महीने में नमाज-ए-तरावीह में कुरान मुकम्मल सुन लेने के पश्चात सुरह-ए-तरावीह पढ़ी जाती है. यह सिलसिला ईद की चांद नज़र आने तक चलता रहता है. इसे भी पढ़ें :जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-lover-refused-to-marry-then-the-girlfriend-cut-the-vein-of-the-hand/">जमशेदपुर: प्रेमी ने शादी से किया इंकार तो प्रेमिका ने काटी हाथ की नस [wpse_comments_template]

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