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बनहरदी कोल ब्लॉक के विस्थापित एनटीपीसी से नाराज, कहा- नहीं देंगे जमीन

  • दलालों के माध्यम से ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहण करने की तैयारी में एनटीपीसी
  • ग्रामीणों ने दो टूक कहा- कंपनी अपना विश्वास खो चुकी है, अब हम जमीन नहीं देंगे
Sunil Kumar Latehar :  जिला मुख्यालय के बंद कैंपस में एनटीपीसी के द्वारा रेजिंग डे मनाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. शुभम संदेश में छपी खबर पर बनहरदी के रैयत व विस्थापितों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विस्थापितों का कहना है कि कोलियरी खुलने से पहले ही कंपनी का यह हाल है तो कोलियरी खुल जाने के बाद क्या होगा. विस्थापितों ने कंपनी के अधिकारियों को चाटुकारों एवं दलालों के घिरे रहने का आरोप लगाया है. विस्थापितों ने कहा कि लाखों रुपये खर्च कर रेजिंग डे मनाया गया, लेकिन बनहरदी के रैयतों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गयी. मामला इतना तूल पकड़ लिया है कि बनहरदी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र के निवासियों ने एनटीपीसी को जमीन नहीं देने का निर्णय लिया है.

दलालों के माध्यम से ग्रामीणों को डराया-धमकाया जा रहा

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alt="" width="600" height="400" /> बारी ग्राम के जोखा टोला निवासी राजेंद्र उरांव का कहना है कि उनकी कुल ढाई एकड़ जमीन अधिग्रहण की सूचना जारी हो गई है, लेकिन कंपनी के लोग हमेशा दलालों के माध्यम से उन्हें डरा धमकाकर जमीन के पेपर पर हस्ताक्षर कराना चाहते हैं. महेश्वर उरांव का कहना है कि कंपनी के लोग हमेशा चाटुकारों से घिरे हुए रहते हैं. सर्वे और जनसुनवाई चाटुकारों के बीच ही संपन्न हो जा रही है. ग्रामीणों को इसकी विदिवत जानकारी भी नहीं दी जा रही है. एनटीपीसी के अफसर मनमानी कर रहे हैं. ग्रामीणों की उपेक्षा कर रहे हैं. हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.

नहीं दी जा रही कंपनी की पुनर्वास व मुआवजा नीति की जानकारी

ग्राम छातासेमर के रमेश उरांव ने कहा कि कंपनी की पुनर्वास व मुआवजा नीतियों से ग्रामीणों को अवगत नहीं कराया जा रहा है. बनहरदी ग्राम के ही चंद्रदेव व परमेश्वर उरांव ने बताया कि जब शुरू में ही कंपनी के लोगों यह यह रवैया है तो जमीन देने के बाद विस्थापितों के साथ उनका व्यवहार क्या होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. कलावती विश्वकर्मा का कहना है कि कोयला खनन परियोजना का स्वरूप क्या होगा, विस्थापन नीति क्या होगी इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं दी जा रही है. कंपनी के अधिकारियों को कभी भी विस्थापितों का दुख दर्द सुनने का मौका नहीं मिल रहा है. वे जिला में कार्यक्रम करते हैं, लेकिन किसी रैयत या विस्थापित को बुलाना तक मुनासीब नहीं समझते हैं. वे हमेशा जिला और राज्य मुख्यालय में ही रहना पसंद करते हैं. क्या कहते हैं एनटीपीसी के महाप्रबंधक

जीएम ने दी सफाई- कंपनी के लिए रैयतों का हित सर्वोपरि

एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरबी सिंह का कहना है कि कंपनी धरातल पर काम कर रही है. अभी कुछ कागजी प्रक्रिया बाकी है, इसलिए ग्रामीणों से सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा है, लेकिन उनके लिए रैयतों का हित सर्वाेपरी है. कंपनी रैयतों के हितों का पूरा-पूरा ख्याल रखेगी. झारखंड">https://lagatar.in/category/jharkhand/south-chotanagpur-division/ranchi/">झारखंड

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