Search

 
 
 

नीलामी की पूरी रकम लेने के बाद कब्जा नहीं दिया, तो बैंक को देना होगा ब्याजः हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा है कि नीलामी में पूरी रकम प्राप्त करने के बाद यदि बैंक खरीदार को संपत्ति का कब्जा नहीं देता और रकम लंबे समय तक अपने पास रखता है, तो उसे ब्याज सहित रकम लौटानी होगी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के 17 जून 2026 के उस आदेश को बरकरार रखा,
 
  • हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अपील की खारिज 
  • 30.90 लाख रुपये पर 6% ब्याज देने का आदेश रखा बरकरार

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा है कि नीलामी में पूरी रकम प्राप्त करने के बाद यदि बैंक खरीदार को संपत्ति का कब्जा नहीं देता और रकम लंबे समय तक अपने पास रखता है, तो उसे ब्याज सहित रकम लौटानी होगी. 


हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के 17 जून 2026 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें बैंक को 30.90 लाख रुपये की जमा राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया गया था. दरअसल यह मामला जमशेदपुर की रहने वाली शिप्रा शिखा से संबंधित है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने 14 सितंबर 2022 को जमशेदपुर स्थित 'दलमा एन्क्लेव' के एक फ्लैट की ई-नीलामी की थी. शिप्रा शिखा ने इसमें सबसे अधिक 30.90 लाख रुपये की बोली लगाई. उन्होंने 15 से 26 सितंबर 2022 के बीच पूरी बोली राशि बैंक में जमा कर दी.

 

रकम जमा करने के बाद उन्होंने कई बार बैंक से बिक्री प्रमाणपत्र और संपत्ति का कब्जा देने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिला. बैंक ने अक्टूबर 2023 में उन्हें बताया कि संपत्ति का भौतिक कब्जा लेने के लिए जिला दंडाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम के समक्ष SARFAESI Act की धारा 14 के तहत कार्रवाई चल रही है. 


कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, बैंक की ओर से 15 मार्च 2023 की तारीख वाला बिक्री प्रमाणपत्र शिप्रा शिखा को 27 अक्टूबर 2023 को ई-मेल के माध्यम से भेजा गया. यानी ई-नीलामी के करीब 13 महीने बाद प्रमाणपत्र भेजा गया. इसके बावजूद संपत्ति का वास्तविक कब्जा उन्हें नहीं मिला.
इस बीच शिप्रा शिखा ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और आर्थिक जरूरत का हवाला देते हुए अपनी 30.90 लाख रुपये की रकम वापस करने की मांग की. बैंक ने 22 नवंबर 2023 को ई-नीलामी रद्द करने की सूचना दी.

 

हालांकि रकम 6 अप्रैल 2024 को वापस की गई. हालांकि बैंक ने रकम वापस करते समय उनसे यह अंडरटेकिंग भी ली कि भविष्य में वह रद्द की गई नीलामी से संबंधित कोई दावा नहीं करेंगी. बाद में शिप्रा शिखा ने बैंक से ब्याज की मांग की. बैंक ने इसका विरोध करते हुए कहा कि रकम की वापसी खुद खरीदार ने मांगी थी और उसने भविष्य में कोई दावा नहीं करने की अंडरटेकिंग भी दी थी. 


हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पूरी रकम जमा करने के बावजूद लंबे समय तक संपत्ति का कब्जा नहीं मिलने के बाद रकम वापस मांगी थी. वह बीमारी और चिकित्सा संबंधी जरूरत के कारण पैसे की तत्काल जरूरत में थीं. ऐसे में बैंक द्वारा ली गई अंडरटेकिंग दबाव की स्थिति में ली गई प्रतीत होती है. कोर्ट ने कहा कि दबाव, धमकी या अनुचित प्रभाव में दी गई सहमति स्वतंत्र सहमति नहीं मानी जा सकती. इसलिए बैंक इस अंडरटेकिंग के आधार पर ब्याज के दावे से बच नहीं सकता.


खंडपीठ ने कहा कि खरीदार से पूरी नीलामी राशि लेने के बाद बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह उचित समय के भीतर संपत्ति का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराता. ऐसा नहीं होने पर बैंक को जमा रकम उपयुक्त ब्याज के साथ लौटानी चाहिए थी.


फैसले में कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कर्जदार और बैंक के बीच विवाद के निपटारे की प्रक्रिया चल रही थी और मामला लोक अदालत में भी भेजा गया था. इसके बावजूद बैंक दूसरी ओर नीलामी खरीदार को संपत्ति का कब्जा देने का आश्वासन देता रहा.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

 

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही