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बानू मुश्ताक की 'हार्ट लैंप' को अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार, सिद्धारमैया ने दी बधाई

 अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली पहली कन्नड़ लेखिका बनीं Lagatar Desk :  लेखिका, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता बानू मुश्ताक ने इतिहास रचते हुए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार अपने नाम कर लिया है. यह सम्मान उन्हें उनके कन्नड़ लघु कथा संग्रह हार्ट लैंप’ के लिए प्रदान किया गया है. यह उपलब्धि विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह कन्नड़ भाषा की पहली पुस्तक है, जिसे इस प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार से नवाजा गया है. अवॉर्ड फंक्शन मंगलवार रात लंदन के प्रतिष्ठित टेट मॉडर्न में आयोजित किया गया, जहां बानू मुश्ताक ने अपनी अनुवादक दीपा भास्थी के साथ यह पुरस्कार ग्रहण किया. दीपा भास्थी ने इस संग्रह का कन्नड़ से अंग्रेजी में अनुवाद कर इसे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. https://twitter.com/PTI_News/status/1925015542433501555

सिद्धारमैया ने बानू मुश्ताक को दी बधाई कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बानू मुश्ताक को उनके कन्नड़ लघु कथा संग्रह के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने पर बधाई दी और कहा कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कन्नड़ की महानता का झंडा बुलंद किया है. इसे भी पढ़ें : नियुक्ति">https://lagatar.in/policy-changes-made-before-appointment-cannot-be-challenged-high-court/">नियुक्ति

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छह वैश्विक पुस्तकों में शामिल होकर जीता सम्मान मुश्ताक की लेखनी को निर्णायक मंडल ने गंभीर सामाजिक विषयों को मार्मिक, व्यंग्यात्मक और सजीव शैली में प्रस्तुत करने के लिए सराहा. ‘हार्ट लैंप’ में बुनी गई कहानियां परिवार, समाज और आत्म-संघर्ष के बीच के महीन धागों को बेहद संवेदी दृष्टिकोण से उजागर करती हैं.
हर कहानी मायने रखती है :  मुश्ताक मुश्ताक ने कहा कि यह पुस्तक इस विश्वास से जन्मी है कि कोई भी कहानी कभी छोटी नहीं होती. मानव अनुभव के ताने-बाने में हर धागा अपना पूरा वजन रखता है. एक ऐसी दुनिया में, जो जो अक्सर हमें विभाजित करने की कोशिश करती है, साहित्य एक खोया हुआ पवित्र स्थान है, जहां हम एक-दूसरे के मन में रह सकते हैं, भले ही कुछ पन्नों के लिए ही क्यों न हो. मुश्ताक ने इस उपलब्धि को विविधता और भाषाई समावेशिता की जीत बताया. उनके अनुसार, क्षेत्रीय भाषाओं की अभिव्यक्ति और भावनात्मक गहराई को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना साहित्य की सबसे सुंदर उपलब्धियों में से एक है.
53 लाख दी जाती है प्राइज मनी  अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के तहत 53 लाख की राशि प्रदान की जाती है, जिसे लेखक और अनुवादक बराबर रूप से साझा करते हैं. यह पुरस्कार अनुवादित साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिया जाता है और विश्व साहित्य में अनूठे योगदान को सम्मानित करता है. `हार्ट लैंप` की यह ऐतिहासिक सफलता न सिर्फ बानू मुश्ताक की लेखनी की जीत है, बल्कि कन्नड़ भाषा और भारतीय साहित्य की वैश्विक पहचान का भी प्रतीक बन गई है. इसे भी पढ़ें : पलामू">https://lagatar.in/palamu-tspcs-top-commander-gautam-yadav-arrested-from-banaras/">पलामू

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