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बीएयू को आईसीएआर से मिली मान्यता, कुलपति ने खुशी जाहिर की

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Ranchiराष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड के अनुमोदन से नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) को मान्यता दे दी गई है. बीएयू को 2.85 स्कोर के साथ बी ग्रेड मिला है. इसे 31 मई 2021 से 30 मई 2026 तक विश्वविद्यालय कार्यक्रम एवं महाविद्यालय के लिए प्रदान किया गया है. इस बीच कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने आईसीएआर से बीएयू को अगले 5 वर्षों की मान्यता मिलने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने बताया कि आईसीएआर से गठित पीयर रिव्यू टीम ने मार्च, 2021 तक की सेल्फ स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक बीएयू के कार्यक्रमों एवं महाविद्यालयों का मूल्यांकन किया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/bau1-1.jpg"

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नये महाविद्यालयों को जल्द ही मान्यता मिलने की आशा

कुलपति ने कहा कि विवि को अप्रैल, 2021 से अबतक राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों उपलब्धियां मिली हैं. राज्य सरकार एवं झारखंड लोक सेवा आयोग से सहयोग में तेजी आयी है. हालांकि सभी 7 नये महाविद्यालयों में विगत 5 वर्षों में भी नियमित एसोसिएट डीन, सहायक प्राध्यापक एवं कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है. पुराने महाविद्यालयों में भी नियमित डीन, सहायक प्राध्यापक, सह प्राध्यापक एवं विवि प्राध्यापक एवं कर्मचारियों की कमी है. विवि द्वारा पीयर रिव्यू टीम के सुझावों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. राज्य के एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय की गरिमा बनाये रखने के लिए सभी स्तर पर विशेष प्रयास एवं सहयोग की अपेक्षा विवि को है. हमें आशा है कि विवि के नये महाविद्यालयों को जल्द ही मान्यता मिल जाएगी.

आईसीएआर ने बीएयू अधीन इन कॉलेजों को मिला मान्यता 

आईसीएआर ने बीएयू के अधीन रांची कृषि महाविद्यालय कांके के बीएससी (ऑनर्स) कृषि प्रोग्राम, रांची वानिकी महाविद्यालय कांके के बीएससी (ऑनर्स) वानिकी प्रोग्राम एवं नये मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, गुमला के बीएफएससी प्रोग्राम को बी ग्रेड के साथ मान्यता दे दी है. तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय, गोड्डा के बीएससी (ऑनर्स) कृषि प्रोग्राम को भी मान्यता मिली है. पहले बैच से विद्यार्थी पास आउट नहीं होने के कारण कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय, कांके एवं उद्यान महाविद्यालय खूंटपानी (चाईबासा) के मान्यता पर विचार नहीं किया गया. नियमित एसोसिएट डीन एवं सहायक प्राध्यापकों के नहीं होने एवं प्रशासनिक बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए कृषि महाविद्यालय गढ़वा, रविन्द्र नाथ टैगोर कृषि महाविद्यालय देवघर, फूलो झानो दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय हंसडीहा (दुमका) की मान्यता के लिए अलग से प्रस्ताव भेजने को कहा गया है. रांची कृषि महाविद्यालय, कांके के एग्रोनोमी, जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, एंटोमोलॉजी एवं प्लांट पैथोलॉजी विषय तथा रांची वानिकी महाविद्यालय के सिल्वीकल्चर तथा एग्रोफॉरेस्ट्री के पीजी एवं पीएचडी प्रोग्राम को मान्यता मिली है. इसे भी पढ़ें-  रांची">https://lagatar.in/ranchi-university-cvs-core-committee-meeting-many-decisions/">रांची

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विवि अकादमिक काउंसिल बोर्ड से अनुमोदन लेकर प्रस्ताव भेजने को कहा गया

ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया (बीएसएमए) -2021 अनुशंसा आधारित नामकरण के आभाव में रांची कृषि महाविद्यालय, कांके के एग्रो मेटरोलॉजी एंड एनवायरनमेंट, हॉर्टिकल्चर, एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन एंड कम्युनिकेशन, साइल साइंस एंड एग्रीकल्चरल केमिस्ट्री के पीजी एवं पीएचडी प्रोग्राम, एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी के पीजी प्रोग्राम तथा रांची वानिकी महाविद्यालय के नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट एवं फॉरेस्ट्री प्रोडक्ट्स एंड यूटिलाइजेशन के पीजी प्रोग्राम को बीएसएमए आधारित नामकरण कर विवि अकादमिक काउंसिल बोर्ड से अनुमोदन लेकर प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है.

दशकों से नियमित शिक्षकों की कमी 

दशकों से नियमित शिक्षकों की कमी के कारण रांची पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय की मान्यता पर सवाल खड़ा किया गया है. महाविद्यालय आधारभूत संरचना के मामले में समृद्ध है. वेटनरी कांउंसिल ऑफ इंडिया (भीसीआई) ने नियमित शिक्षकों की कमी पर चिंता जाहिर की थी, पिछली बार सशर्त मान्यता मिली थी. हाल में झारखंड लोक सेवा आयोग ने 8 पदों पर नियमित नियुक्ति की है. महाविद्यालय के विभागों में सह प्राध्यापक एवं विवि प्राध्यापक की नितांत कमी है. भीसीआई की शर्तों को पूरा नहीं होने के कारण ही आईसीएआर से इस महाविद्यालय को मान्यता नहीं मिल पायी है. इसे भी पढ़ें- आजसू">https://lagatar.in/ajsu-student-union-met-dspmus-vc-submitted-a-five-point-demand-letter/">आजसू

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