Girish Malviya
''अपनी फोटो को दे 80-90 के दशक का रेट्रो लुक" फेसबुक पर कल से यह ट्रेंड चल रहा है. अपने कई मित्रों को ऐसी तस्वीर लगाकर इतराते हम लगातार अपनी फीड में देख रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे जुड़े खतरे क्या है?
AI चैटबॉट्स को जब हम इस तरह का promt लिखकर अपनी तस्वीरें इस्तेमाल करने की अनुमति देते हैं तो बैकग्राउंड में वो क्या-क्या एक्टिविटी करता है? सबसे पहले AI हमारा बायोमेट्रिक डेटा हमारे द्वारा ही दिए ओरिजनल हाई रिजॉल्यूशन फोटो से निकालता है. इस डाटा से आपके चेहरे की बनावट, आंख, नाक, कान ओर चेहरे की विशिष्ट पहचान जैसे तिल और स्किन की अन्य सभी विशेषताएं पता चल जाती है, कंपनियां इन तस्वीरों का उपयोग अपने एआई मॉडल और फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) को बेहतर बनाने के लिए करती है.
आपके डिवाइस की जानकारी अपडेट हो जाती है. आपका आईपी एड्रेस, फोन नंबर, फोन का मॉडल और किस कंपनी का इंटरनेट डेटा आप यूज कर रहे हैं, सब रिफ्रेश हो जाता है. जब उस एआई टूल के पास आपकी स्किन, पोर्स, बाल, तिल, निशान, टेक्सचर सब कुछ देखने की क्षमता है ओर इंटरनेट पर आपकी अन्य बहुत सारी फोटो और अलग–अलग एंगल से वीडियो पहले से भी डली हुई है तो आपके इस ओरिजनल फोटो और पहले से मौजूद फोटो वीडियो से AI आपके चेहरे और शरीर का काफी सटीक 3D मॉडल बना सकता है, जो बाद में डीपफेक, फेस स्वैप या और भी एडवांस चीजों में इस्तेमाल हो सकता है.
इस तरह से आप खुद ही AI को अपने बारे में पूरा वेरिफाइड डेटा दे रहे हो, जो काम करोड़ों रुपए देकर गूगल फेसबुक जैसी कंपनियां अपना मॉडल ट्रेन करवाती है, वो काम आप खुद ही फ्री में एक ट्रेंड के झांसे में आकर कर दे रहे हो. सबसे बड़ी बात तो यह है कि जो कंपनी आपको 30-40 साल पीछे ले जाकर दिखा रही है और वो ये भी जान रही है कि आप भविष्य के अगले 10-20 सालों में कैसे दिखोगे.
डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं...