National News : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संस्मरणों से सजी किताब Belonging: A Journey of Love 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही है. किताब के पब्लिशर अल्फ्रेड ए नॉफ ने कल मंगलवार को यह जानकारी दी. किताब में सोनिया गांधी का राजनीतिक सफर सहित 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के फैसले से जुड़ा अनुभव सामने आयेगा.
जानकारी के अनुसार इस किताब में सोनिया गांधी ने अपने देश इटली में बिताये बचपन की यादें सहित कैंब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात का जिक्र किया है. इतना ही नहीं, नेहरू-गांधी परिवार में विवाह और परिवार में हुई हत्याओं (इंदिरा गांधी-राजीव गांधी) के बाद जिंदगी में किस तरह का बदलाव आया, उस बारे में लिखा है.
सोनिया गांधी ने साफ कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन परिवार के इरादों, काम और मानवीय पहलुओं को उस तरह नहीं समझा गया, जैसा कि वह वास्तव में है. सोनिया गांधी के अनुसार यह किताब उनकी(परिवार) इंसानियत को समर्पित है.
किताब में सोनिया गांधी के जीवन के साथ-साथ भारत में लगभग छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया देखने को मिलेगा. सोनिया गांधी के अनुसार जब उन्होंने राजनीति से कुछ दूरी बनाकर पीछे मुड़कर खुद के जीवन को देखा, तो अपनी कहानी में प्यार और वफादारी का एक धागा साफ नजर आया.
यह धागा इटली के एक छोटे शहर में बिताये गये साधारण बचपन से शुरू होकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की पुत्रवधु के रूप में बिताये समय तक जाता है. किताब में जानकारी दी गयी है कि सोनिया का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना में हुआ था.
सोनिया का पूरा नाम अन्टोनिया एड्विज अल्बीना मैनो है. 1965 में कैंब्रिज में पढ़ाई के दौरान सोनिया की मुलाकात इंदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी से हुई.
साल 1968 में हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों अनुसार दोनों का विवाह संपन्न हुआ. विवाह पश्चात सोनिया भारत आ गईं और इंदिरा गांधी के साथ रहने लगीं. 1970 में राहुल और 1972 में प्रियंका गांधी का जन्म हुआ.
राजीव गांधी पायलट थे, जबकि सोनिया घर गृहस्थी संभालती थीं.1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने, हालांकि सोनिया ने सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूरी बनाये रखी.
किताब में कहा गया है कि 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद भी शुरुआत में सोनिया राजनीति से दूर रहीं थी. उस समय पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने. लेकिन धीरे धीरे कांग्रेस कमजोर होने लगी. 1996 तक पार्टी में कई गुट बन गये.
बदलते घटनाक्रम के बीच 1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गयी. सोनिया गांधी 2017 तक पार्टी अध्यक्ष रहीं.
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