alt="" width="300" height="142" /> खराब पड़ा चापाकल[/caption] मोहनियापहाडी गांव के लोग गांव पुराने विद्यालय भवन में लगे एकमात्र चापाकल के भरोसे अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं. स्थानीय ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गांव के अलावे अगल बगल के टोला में भी पेयजल की समस्या है. अहले सुबह से ही चापाकल पर लोगों की लंबी कतार रहती है. चापाकल पर भीड़ रहने के कारण कुछ महिलाएं गांव के पास ही एक कुएं से पानी लाती हैं, लेकिन वो कुआं भी सूखने के कगार पर है. मोहनियापहाडी गांव के अलावा प्रखंड क्षेत्र के अन्य इलाक़ों में भी पेयजल की समस्या उत्त्पन्न हो गई है. जल स्तर गिर जाने के कारण अधिकांश चापानल से पानी निकालना बंद हो गया है. कुंए खुद प्यासे हैं. लिहाज़ा लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं. हालांकि पंचायत स्तर पर खराब चापानल की मरम्मत का काम शुरू किया गया है. लेकिन सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चापानल अब तक खराब पड़े हैं.
जल नल योजना से जगी थी आस, मगर...
हर घर में पानी पहुंचाने के लिए जल नल योजना चलाई गई है. योजना के तहत हर घर में नल के माध्यम से पानी पहुंचाने की कवायद शुरू की गई. लेकिन विभागीय उदासीनता और संवेदक की लापरवाही के कारण अभी तक एक भी गांव में योजना को पूर्ण नहीं किया गया है. ज़्यादातर गांवों में संवेदक द्वारा स्ट्रक्चर खड़ा कर बिलिंग पर ध्यान दिया जा रहा है. इस भीषण गर्मी में भी घरों तक पानी पहुंचाने की दिशा में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है. यह">https://lagatar.in/gawan-along-with-electricity-the-sensitivity-of-the-department-also-failed-children-were-forced-to-study-in-dhibari/">यहभी पढ़ें : गावां : बिजली के साथ विभाग की संवेदना भी हो गई गुल, बच्चे ढ़िबरी में पढ़ने को मजबूर [wpse_comments_template]

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